Karnataka Bank: बैंक के खिलाफ एक रिट याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति केवी अरविंद की एकल पीठ ने हाल के एक आदेश में कहा बैंक सार्वजनिक वित्त की सेवा दे रहा है और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से विनियमित है, लेकिन इसे किसी भी वैधानिक या सार्वजनिक कर्तव्य को करने वाली संस्था या कंपनी नहीं कहा जा सकता है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निजी क्षेत्र के कर्नाटक बैंक के खिलाफ एक रिट याचिका खारिज कर दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि कहा कि कर्नाटक का निजी बैंक कर्नाटक बैंक संविधान के अनुसार राज्य नहीं है और इसे किसी भी वैधानिक या सार्वजनिक कर्तव्य को निभाने वाली संस्था या कंपनी नहीं कहा जा सकता है।
विज्ञापन
बैंक के खिलाफ एक रिट याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति केवी अरविंद की एकल पीठ ने हाल के एक आदेश में कहा, "हालांकि प्रतिवादी बैंक सार्वजनिक वित्त की सेवा दे रहा है और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से विनियमित है, लेकिन इसे किसी भी वैधानिक या सार्वजनिक कर्तव्य को करने वाली संस्था या कंपनी नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 12 अधिकारियों को परमादेश की रिट जारी नहीं की जा सकती है।"
राजेश कुमार शेट्टी ने अपनी याचिका में टी सुब्बाया शेट्टी और कर्नाटक बैंक के खिलाफ याचिका दायर कर उन्हें अपने खाते से 1,24,27,826 रुपये की सावधि जमा राशि निकालने की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की थी।