केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न तैयार वस्त्रों (apparel items) पर अगले साल एक जनवरी से जीएसटी की दरें बढ़ाने के फैसले पर देश के अग्रणी होजियरी निर्माताओं के महासंघ ने चिंता जताई है। संगठन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह हाल ही में जारी की गई जीएसटी वृद्धि की अधिसूचना पर अमल स्थगित करे। उसका कहना है कि जीएसटी बढ़ाने से आम आदमी व मध्यम श्रेणी के उद्योगों (MSME sector) पर असर पड़ेगा।
फेडरेशन ऑफ होजियरी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FOHMA) ने गुरुवार को कहा कि मौजूदा जीएसटी दरें 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने से 1000 रुपये से कम कीमत के वस्त्रों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो जाएगी। इस कदम से समाज के कमजोर तबके पर असर पड़ेगा, क्योंकि वह ज्यादातर 1000 रुपये से कम कीमत के कपड़े खरीदता है।
महासंघ ने यह भी कहा कि यह भी गौर करने लायक है कि देश के कुल गारमेंट मार्केट का 85 फीसदी कारोबार 1000 रुपये से कम मूल्य के कपड़ों का है। संगठन ने यह भी कहा कि 12 फीसदी व 18 फीसदी जीएसटी की स्लैब को मिलाकर एक दर करने के प्रस्ताव से गारमेंट पर जीएसटी में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।
होजियरी निर्माताओं ने कहा कि हमने सरकार व जीएसटी परिषद को कई ज्ञापन देकर आग्रह किया है कि वह भारतीय तैयार वस्त्र उद्योग की खातिर यह प्रस्तावित बढ़ोतरी टाल दे। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि दुर्भाग्य से हमारे आग्रह पर विचार नहीं किया गया, यह बेहद दुखद है।
महासंघ ने कहा कि इस उद्योग की अधिकांश इकाइयां एमएसएमई क्षेत्र में हैं। ऐसे में कपड़ों पर जीएसटी 12 फीसदी करने का उस पर बुरा असर होगा, क्योंकि वह पहले से ही संसाधनों व पूंजी के संकट से जूझ रही हैं। ऐसे में लघु उद्योगों पर और बोझ बढ़ाना अनुचित होगा।