सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों के अंत में केंद्र का राजकोषीय घाटा पूरे साल के लक्ष्य का 27 प्रतिशत तक पहुंच गया। महालेखा नियंत्रक (सीजीए) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल मिलाकर राजकोषीय घाटा- व्यय और राजस्व के बीच का अंतर - अगस्त के अंत तक 4,35,176 करोड़ रुपये था। 2023-24 की इसी अवधि में यह घाटा बजट अनुमान (बीई) का 36 प्रतिशत था।
दूसरी ओर, भारत का चालू खाता घाटा अप्रैल-जून में मामूली रूप से बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद का 1.1 प्रतिशत हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को कहा कि देश का चालू खाता घाटा अप्रैल-जून 2024 में मामूली रूप से बढ़कर 9.7 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद का 1.1 प्रतिशत हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 8.9 अरब डॉलर या एक प्रतिशत था।
देश की ताकत को दर्शाने वाला यह महत्वपूर्ण आंकड़ा, इससे पहले जनवरी-मार्च तिमाही में दर्ज 4.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद के 0.5 प्रतिशत के अधिशेष के बाद आया है।
रिजर्व बैंक ने चालू खाता घाटे में साल-दर-साल बढ़ोतरी का कारण वस्तु व्यापार घाटे में वृद्धि को बताया है, जो वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में 65.1 बिलियन अमरीकी डॉलर दर्ज किया गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 56.7 बिलियन अमरीकी डॉलर था।
आरबीआई ने कहा कि समीक्षाधीन तिमाही के दौरान शुद्ध सेवा प्राप्तियां एक वर्ष पूर्व के 35.1 अरब डॉलर से बढ़कर 39.7 अरब डॉलर हो गईं। साथ ही, कंप्यूटर सेवाओं, व्यापार सेवाओं, यात्रा सेवाओं और परिवहन सेवाओं में वृद्धि देखी गई।
हालांकि, आरबीआई ने कहा कि शुद्ध विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में तीव्र गिरावट आई है और यह पहली तिमाही के दौरान एक साल पहले के 15.7 अरब डॉलर से घटकर 0.9 अरब डॉलर रह गया।