ठोस आर्थिक विकास के दावे करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार में वित्त मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज भारत की क्षमता का बखान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए नीतिगत और राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ निर्णायक नेतृत्व बेहद जरूरी है।
नौ साल में पांच स्थान की छलांग
नई दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में वार्षिक दिवस समारोह में वित्त मंत्री ने कहा कि अतीत में भारत दुनिया की पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया था। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा, सरकार की 'फ्लिप-फ्लॉप' नीतियां आर्थिक प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार की उपलब्धियों के बारे में सीतारमण ने कहा कि भारत 2014 में दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर वर्तमान में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
किस्मत नहीं, नीतियों की बदौलत 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत
बकौल वित्त मंत्री, आर्थिक नीतियों, सरकार के ठोस प्रयासों को दरकिनार कर केवल ऐसा कहना कि भारत की आर्थिक तरक्की एक नियति है, ठीक नहीं। उन्होंने कहा, हमें विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता, स्थिरता और निर्णायक राजनीतिक निर्णय लेने की जरूरत है।
अर्थव्यवस्था में सभी वर्गों के लोगों का योगदान
भारत अपने आप तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, ऐसा कहना देश के उद्यमियों, किसानों और आर्थिक विकास में योगदान कर रहे अन्य वर्गों के प्रयासों को कमजोर करना है। सरकार की नीतियों के अलावा श्रमिक और औद्योगिक वर्ग के तमाम लोग भारत की इकोनॉमी को लगातार आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
मोदी सरकार के कार्यकाल में 595.25 बिलियन डॉलर का FDI
पिछले नौ वर्षों की एनडीए सरकार का जिक्र करते हुए सीतारमण ने कहा, मोदी सरकार ने जो आर्थिक नीतियां अपनाई उनका अच्छा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले 23 वर्षों के दौरान 919 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कुल प्रत्यक्ष विदेश निवेश (एफडीआई) प्रवाह में से लगभग 65 प्रतिशत (595.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर) सिर्फ पिछले नौ वर्षों के दौरान आए हैं।
पीएम मोदी नोबेल जीतने वाले अर्थशास्त्री का सिद्धांत अपना रहे
विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता और निर्णायक राजनीतिक निर्णय लेने की अहमियत बताते हुए सीतारमण ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता रिचर्ड थेलर की नज थ्योरी का इस्तेमाल किया। इससे भारत की जरूरतों के अनुसार आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का भरपूर प्रयास हुआ।
'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' स्कीम में नोबेल विजेता की सोच
उन्होंने कहा, नज थ्योरी का उपयोग "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना में देखा जा सकता है। इस अभियान की मदद से ने लिंगानुपात में सुधार दर्ज किया गया है। स्टैंड-अप इंडिया के तहत महिलाओं को रियायती बैंक लोन दिए गए हैं; सक्षम लोगों को एलपीजी सिलेंडर सब्सिडी छोड़ने के लिए प्रेरित भी किया गया है।"
गरीबों को समर्पित है एनडीए सरकार, योजनाओं में दिख रही झलकियां
वित्त मंत्री ने कहा, बिचौलियों पर निर्भरता कम करने के लिए रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचने वाले लोगों को भी लोन की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि ऋण सुविधा देने के लिए पीएम स्वनिधि योजना शुरू की गई। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन- 17 सितंबर के दिन शुरू हुई पीएम विश्वकर्मा योजना में भी इसी सिद्धांत के तहत काम हो रहा है।
प्रधानमंत्री क्या करना चाहते हैं? वित्त मंत्री ने बताई नीति
सीतारमण ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी लोगों को सशक्त बनाने, अपने मन और रुचि के मुताबिक काम करने का विकल्प देने पर विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी बुनियादी चीजों पर खर्च करने, आम जनता तक संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करने में दृढ़ता से विश्वास करते हैं। वित्त मंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री लोगों को यह तय करने की शक्ति देते हैं कि वे कहां रहना चाहते हैं। आवास, सड़क, पेयजल, शौचालय आदि जैसी जरूरी और बुनियादी सुविधाएं भी प्रधानमंत्री की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल हैं।