आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होने के साथ ही नए-नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, इससे भी ऊर्जा की खपत में तेज वृद्धि हो रही है। लोगों के बदलते जीवन स्तर, बदलती जीवन शैली, टीवी, वाहन, फ्रिज और एयर कंडीशन के लगातार बढ़ते प्रयोग से भी देश के सामने ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यह चुनौती समय के साथ और गंभीर होती जाएगी। केंद्र सरकार आने वाली इस भयंकर चुनौती को महसूस कर रही है। संभवतया यही कारण है कि बजट में इन ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रभावी और दूरगामी कदम उठाए गए हैं।
केंद्र सरकार ने बजट में घोषणा की है कि अब छोटे परमाणु रिएक्टर स्थापित किया जा सकेंगे। इससे लोगों को साफ-स्वच्छ, हरित ऊर्जा मिल सकेगी। परमाणु ऊर्जा केंद्र तैयार करने में पहले के लगभग दस सालों के मुकाबले अब दो से तीन साल का ही समय लगेगा और जल्द से जल्द किसी परमाणु केंद्र से ऊर्जा प्राप्त की जा सकेगी। इससे देश के दूरदराज क्षेत्रों में भी छोटे-छोटे केंद्र स्थापित कर स्थानीय स्तर पर लोगों को ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकेगी। सरकार ने बायो फ्यूल, सौर ऊर्जा और अन्य हरित ऊर्जावान स्रोतों को भी बढ़ावा दिया है। इससे भी ऊर्जा संकट को सुलझाने में मदद मिलेगी।
दोहरी चुनौती
ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने अमर उजाला से कहा कि भारत के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ तो देश में लगातार ऊर्जा की खपत लगातार बढ़ रही है, वहीं ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के कारण प्रदूषण के स्तर में भी तेज बढ़ोतरी हो रही है। सरकार ने प्रदूषण को 2070 तक शून्य के स्तर पर लाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन बढ़ती ऊर्जा खपत के कारण यह लक्ष्य प्राप्त करना संभव नहीं था। यह लक्ष्य केवल तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब हमारी ऊर्जा खपत का बड़ा हिस्सा हरित ऊर्जा के माध्यम से आए। देश को प्रदूषण रहित हरित ऊर्जा देकर ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
नरेंद्र तनेजा ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बजट में परमाणु रिएक्टर से प्राप्त ऊर्जा को बढ़ावा दिया गया है। सौर ऊर्जा, पानी और वायु के माध्यम से प्राप्त होने वाले ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देकर ही इस लक्ष्य को हासिल करने का उपाय किया गया है। इससे देश की बढ़ती औद्योगिक इकाइयों को ऊर्जा मिल सकेगी, साथ ही लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए नवीन साधनों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा।