जोमैटो
आईपीओ को लेकर जोमैटो पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। डिलीवरी के अलावा अपने प्लेटफॉर्म पर विभिन्न रेस्टोरेंट के मेन्यू उपलब्ध कराने वाली कंपनी जोमैटो आईआईटी- दिल्ली के दो छात्रों दीपेंद्र गोयल और पंकज चड्ढा द्वारा शुरू की गई थी। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने बेन एंड कंपनी में कंसल्टेंट की नौकरी की थी। उसी ऑफिस के कैफे में उन्हें इसका आइडिया आया। जब लंच टाइम में उन्होंने देखा कि मेन्यू देखने के लिए और खाना ऑर्डर करने के लिए कर्मचारी कितना परेशान हैं। यहीं से उनके दिमाग में एक ऑनलाइन वेबसाइट का आइडिया आया।
दीपेंद्र ने अपने दोस्त पंकज के साथ मिलकर एक ऐसी वेबसाइट बनाने की सोची, जिसमें उस इलाके के सभी रेस्टोरेंट के मेन्यू की जानकारी लोगों को आसानी से मिल सके। पहले उन्होंने कंपनी का नाम फूडीबे रखा था, जिसे नवंबर 2010 में बदलकर जोमैटो किया गया। देखते ही देखते उनकी वेबसाइट पर काफी ट्रैफिक आने लगा।
स्नैपडील
जोमैटो, ओला और फ्लिकार्ट की ही तरह स्नैपडील भी दो दोस्तों ने मिलकर खोली थी। अमेरिका में काम साल 2008 में माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व कर्मचारी कुणाल बहल भारत लौटे। स्नैपडील की स्थापना से पहले भारत में उन्होंने अपने सबसे अच्छे दोस्त रोहित बंसल के साथ चार सालों तक विभिन्न व्यवसायों में प्रयोग किया। फिर उन्होंने स्नैपडील को डिस्काउंट कूपन और दैनिक सौदों की वेबसाइट के रूप में स्थापित किया। भारत में फ्लिपकार्ट की सफलता को देखने के बाद, 2012 में कुणाल स्नैपडील को एक पारंपरिक ई-कॉमर्स में बदलना चाहते हैं। पांच वर्षों में कई बिजनेस मॉडल को सफलतापूर्वक बदलने के बाद उन्होंने फ्लिपकार्ट और अमेजन की सहायक कंपनी के रूप में स्नैपडील को संयुक्त रूप से स्थापित किया। देखते ही देखते दो दोस्तों की ये कंपनी प्रसिद्ध हो गई।
बेवकूफ डॉट कॉम
बेवकूफ डॉट कॉम की स्थापना की कहानी भी अन्य कंपनियों की तरह ही दिल्चस्प है। इसकी कहानी कॉलेज से शुरू हुई। आईआईटी-बॉम्बे से सिविल इंजीनियरिंग स्नातकों, प्रबकिरण सिंह और सिद्धार्थ मुनोट ने अपने कॉलेज के उत्सवों में टी-शर्ट प्रिंट करना शुरू किया और उन्हें अपने साथियों से अच्छी मात्रा में ऑर्डर और सर्वश्रेष्ठ प्रतिक्रिया मिली। लेकिन उस समय वे इसे एक व्यवसाय के रूप में जारी रखना नहीं चाहते थे।
लेकिन जब उनका कॉलेज समाप्त हुआ, तो दोनों ने दोबारा इसे शुरू किया और साल 2012 अप्रैल में बेवाकूफ लॉन्च की गई। संयुक्त स्टार्टअप, जो कपड़ों और मोबाइल फोन बेचती है, ग्राहकों से जुड़ने के लिए अपने उत्पादों पर अपनी विशिष्टता, मजेदार कोट्स और आउट-ऑफ-द-बॉक्स मैसेजिंग पर भरोसा करती है। ग्राहकों को उनके उत्पादों की कीमत और उनका अलग कॉन्सेप्ट पसंद आने लगा। शुरुआत में, यह केवल 30,000 रुपये के मूल निवेश के साथ शुरू हुई थी और फिर इसे स्नैपडील के संस्थापक कुणाल बहल से समर्थन मिला।