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आखिर इस वीरान आइलैंड पर क्यों बनी हैं 900 रहस्यमय मूर्तियां? सच्चाई कर देगी हैरान

Tue, 28 Apr 2020 11:05 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ईस्टर आइलैंड पर बनी रहस्यमय मूर्तियां - फोटो : Social media
दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं, जो किसी न किसी वजह से रहस्यमय बनी हुई हैं। ऐसी ही एक जगह दक्षिण अमेरिका में एंडीज पर्वत और प्रशांत महासागर के बीच स्थित देश चिली में है। दरअसल, यहां एक सुनसान आइलैंड है, जहां 900 के करीब रहस्यमय मूर्तियां हैं, जिनके बनने के बारे में अनुमान तो बहुत लगाए जाते हैं, लेकिन असल में इन्हें क्यों बनाया गया था, अभी तक एक रहस्य ही बना हुआ है।
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ईस्टर आइलैंड पर बनी रहस्यमय मूर्तियां - फोटो : Social media
इस आइलैंड का नाम है ईस्टर आइलैंड और यहां बनी रहस्यमय मूर्तियों को 'मोई' नाम से जाना जाता है। ये मूर्तियां लगभग 100 टन वजनी और 30-40 फीट लंबी हैं और सबसे खास बात कि ये देखने में लगभग एक जैसी ही लगती हैं। ऐसा लगता है जैसे सभी को एक ही सांचे में ढाला गया हो। 
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ईस्टर आइलैंड पर बनी रहस्यमय मूर्तियां - फोटो : Social media
कहते हैं कि पत्थर की ये मूर्तियां इतनी मजबूत हैं कि हथौड़े से ठोके जाने के बावजूद इनमें छोटी-मोटी खरोंच के अलावा इन्हें कोई खास नुकसान नहीं पहुंचता। इन मूर्तियों को लेकर एक सवाल हमेशा से बना हुआ है कि आखिर जब इस आइलैंड पर किसी इंसान के रहने के कोई सबूत नहीं मिले हैं तो ये मूर्तियां आखिर यहां आईं कैसे और वो भी एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों? 

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ईस्टर आइलैंड पर बनी रहस्यमय मूर्तियां - फोटो : Social media
कुछ लोगों का मानना है कि सैकड़ों साल पहले एलियंस इस आइलैंड पर आए थे और उन्होंने ही इन मूर्तियों का निर्माण किया था, लेकिन वो इन्हें बीच में ही छोड़कर चले गए। हालांकि ये सब कही-सुनी बातें हैं, जिसका कोई प्रमाण किसी के पास मौजूद नहीं है। 
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ईस्टर आइलैंड पर बनी रहस्यमय मूर्तियां - फोटो : Social media
बताया जाता है कि इन मूर्तियों को रापा नुई कहे जाने वाले लोगों ने वर्ष 1250 से लेकर 1500 के बीच बनाया था, जो ईस्टर आइलैंड पर ही रहते थे। इन्हें बनाने के पीछे की वजह ये बताई जाती है कि वो इन्हें अपने पूर्वजों की याद और सम्मान में बनाते थे, लेकिन इन मूर्तियों को बनाने के चक्कर में जब पेड़ों की अंधाधुंध कटाई होने लगी तो इस द्वीप पर रहना रापा नुई के लिए मुश्किल हो गया। माना जाता है कि इसी वजह से वो इन मूर्तियों का काम अधूरा छोड़कर ही यहां से कहीं और चले गए।   
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