बिहार के जमुई जिले में शिक्षा विभाग हर दिन सुर्खियों में रह रहा है। चाहे विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षकों की वजह से हो या वहां पढ़ने वाले बच्चों से मामला जुड़ा हो। रोजाना किसी न किसी मामले को लेकर शिक्षा विभाग चर्चाओं में बना हुआ है। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को भी सामने आया, दरअसल, जिले के चकाई प्रखंड के पोझा पंचायत स्थित पचकठिया गांव के वार्ड संख्या एक में विद्यालय भवन नहीं है। इस कारण नामांकित 93 बच्चों ने 70 किलोमीटर दूर से आकर जिला मुख्यालय में सड़क किनारे बैठ कर पढ़ाई करना शुरू कर दी और सरकार को आईना दिखाया। इस दौरान बच्चों ने अपने हाथ में तख्ती लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की कि नीतीश अंकल मेरा स्कूल बनवा दो।
2010 में हुई थी स्कूल की स्थापना, लेकिन भवन का कोई अता-पता नहीं
जमुई जिले के चकाई प्रखंड अंतर्गत पोझा पंचायत के पचकठिया गांव वार्ड संख्या एक में स्थिति नवीन प्राथमिक विद्यालय की स्थापना 2010 में हुई थी। लेकिन आज तक वहां स्कूल का निर्माण नहीं हो सका। इस कारण वहां नामांकित 93 आदिवासी बच्चे पेड़ के नीचे खुले में पढ़ाई करने को विवश हैं। इससे बारिश और धूप में बच्चों को काफी परेशानी होती है। कई बार तो कड़ी धूप में पढ़ाई के दौरान बच्चे बीमार भी पड़ गए थे।
'सांसद महोदय नारा बंद करो, स्कूल का प्रबंध करो'
इसी के विरोध में मंगलवार को आदिवासी संघर्ष मोर्चा एवं भाकपा माले के संयुक्त तत्वाधान में पचकठिया गांव के 93 बच्चों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर श्रीकृष्णा सिंह स्टेडियम के सामने सड़क किनारे बैठकर पढ़ाई शुरू कर दी। इस दौरान अपने हाथ में तख्ती लिए बच्चों ने कहा कि मंत्री जी चकाई को चंडीगढ़ बनाने का जुमला बंद करो, बच्चों के लिए स्कूल का प्रबंध करो। सांसद महोदय बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट का नारा बंद करो, बच्चों के लिए स्कूल का प्रबंध करो। हमारा प्यारे स्कूल का फौरन निर्माण करो, नीतीश अंकल हमारे भविष्य से मत खिलवाड़ करो। हम बिना स्कूल कैसे करें पढ़ाई, नीतीश अंकल हमारा स्कूल बनवा दो जैसे नारों के साथ बच्चों ने स्कूल भवन बनवाने की मांग की।
'चकाई को चंडीगढ़ बनाने का मुंगेरी लाल का झूठा सपना '
वहीं, मौके पर मौजूद आदिवासी संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक कल्लू मरांडी और भकपा माले जिला सचिव संभु शरण सिंह ने कहा कि आजदी के 76 साल बाद भी बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल नहीं होना और भारत को विश्व गुरु बनने का सपना देखना बेमानी है। युवा नेता बाबू साहब सिंह ने कहा कि एक तरफ शिक्षा सचिव अपने चेहरा चमकाने के लिए लगातार फरमान जारी कर रहे। लेकिन छात्रों को पढ़ने के लिए न स्मार्ट स्कूल है और न ही उन्नत किस्म की शिक्षा व्यवस्था।
मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि एक तरफ वर्तमान सांसद और मंत्री चकाई को चंडीगढ़ बनाने का मुंगेरी लाल का झूठा सपने दिखाते हैं। वहीं, आदिवासी बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल नहीं देना यह बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट के नाम पर जनता को गुमराह करना है। जबकि उनके संसदीय क्षेत्र के बच्चे सड़क पर पढ़ने के लिए मजबूर हैं, जो जमुई के लिए बड़ी ही शर्म की बात है।
‘महीने भर में पचकठिया में शुरू होगा विद्यालय का निर्माण कार्य’
सड़क पर चल रहे स्कूल कार्यक्रम की सूचना पर पहुंचे एसडीओ अभय कुमार तिवारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से मांग पत्र लेते हुए कहा कि नवीन प्राथमिक विद्यालय पचकठिया जो वर्षों से नहीं बन पाया। उसका एक महीने के अंदर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इस दौरान आश्वासन के बाद सभी बच्चों को घर भेजा गया।