कोरोना संकट में भी निभाया कर्तव्य
फुलमनी की कर्तव्यनिष्ठा उस समय और निखरकर सामने आई जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी। संक्रमण के डर और विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने दिन-रात मरीजों की सेवा की। चाहे रात में आने वाली प्रसव पीड़िताएं हों या गंभीर मरीजों की आपात देखभाल, फुलमनी हर मौके पर तत्पर रहीं। वह कहती हैं कि मरीज की मुस्कान ही मेरी पूजा है। सेवा ही मेरा धर्म है।
‘गुरु’ के नाम से होती हैं सम्मानित
फुलमनी ब्राउद को लोग सम्मान से ‘गुरु’ कहकर बुलाते हैं। उनकी कार्यशैली और संवेदनशील व्यवहार ने उन्हें आमजन के बीच आदर्श बना दिया है। सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद का कहना है कि फुलमनी जैसी नर्सें स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की आत्मा हैं। उनका योगदान स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती में आधारभूत है।
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मिसाल बन गई फुलमनी की कहानी
विश्व नर्स दिवस पर फुलमनी ब्राउद की कहानी इस बात का प्रमाण है कि नर्सें केवल मरीजों की देखभाल नहीं करतीं, बल्कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखती हैं। सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की त्रिवेणी फुलमनी आज उन सभी के लिए प्रेरणा हैं, जो चिकित्सा सेवा को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि मानवता की साधना समझते हैं।