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विश्व नर्स दिवस: फुलमनी ब्राउद के लिए नर्सिंग है सेवा और समर्पण का पर्याय, महामारी में भी नहीं डिगी सेवा-भावना

Mon, 12 May 2025 04:00 AM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान

सार

World Nurses Day 2025: सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद का कहना है कि फुलमनी जैसी नर्सें स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की आत्मा हैं। उनका योगदान स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती में आधारभूत है। पढ़ें पूरी खबर...।
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नर्स फुलमनी ब्राउद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हर वर्ष 12 मई को मनाया जाने वाला विश्व नर्स दिवस उन नर्सों को सम्मानित करने का दिन है, जो दिन-रात मरीजों की देखभाल में जुटी रहती हैं। इसी अवसर पर सीवान जिले की सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) फुलमनी ब्राउद की प्रेरणादायक कहानी सामने आती है, जिन्होंने नर्सिंग को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम मानते हुए अपना पूरा जीवन गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

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गरीबी ने सिखाई संवेदनशीलता
फुलमनी ब्राउद का जीवन संघर्षों और सेवा के मेल से बना है। बचपन में गरीबी का गहरा अनुभव करने के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि वह हमेशा जरूरतमंदों की सेवा करेंगी। 1989 में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने झारखंड के रांची और खूंटी जैसे पिछड़े इलाकों में काम शुरू किया। जहां उन्होंने असहाय और गरीब लोगों की चिकित्सा सेवा में खुद को झोंक दिया।

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मातृ मृत्यु दर में लाईं गिरावट
फुलमनी ने 2002 में सीवान जिले के गोरेयाकोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में सेवा शुरू की। इसके बाद भीट्ठी गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में छह साल तक अपनी सेवाएं दीं। 2008 से वे बसंतपुर सीएचसी में कार्यरत हैं, जहां वे प्रसव कक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनकी सादगी, समर्पण और करुणा की भावना ने उन्हें मरीजों और ग्रामीणों के बीच एक विशेष स्थान दिलाया है।
 
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमार रवि रंजन बताते हैं कि फुलमनी ब्राउद ने विगत 17 वर्षों में प्रसव संबंधी देखभाल में जो योगदान दिया है, उससे क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उनकी सेवाओं के कारण आज भी कई महिलाएं, विशेष रूप से भीट्ठी गांव की गर्भवती महिलाएं, बसंतपुर आकर प्रसव कराना ही बेहतर समझती हैं।
 

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नर्स फुलमनी ब्राउद - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संकट में भी निभाया कर्तव्य
फुलमनी की कर्तव्यनिष्ठा उस समय और निखरकर सामने आई जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी। संक्रमण के डर और विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने दिन-रात मरीजों की सेवा की। चाहे रात में आने वाली प्रसव पीड़िताएं हों या गंभीर मरीजों की आपात देखभाल, फुलमनी हर मौके पर तत्पर रहीं। वह कहती हैं कि मरीज की मुस्कान ही मेरी पूजा है। सेवा ही मेरा धर्म है।
 
‘गुरु’ के नाम से होती हैं सम्मानित
फुलमनी ब्राउद को लोग सम्मान से ‘गुरु’ कहकर बुलाते हैं। उनकी कार्यशैली और संवेदनशील व्यवहार ने उन्हें आमजन के बीच आदर्श बना दिया है। सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद का कहना है कि फुलमनी जैसी नर्सें स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की आत्मा हैं। उनका योगदान स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती में आधारभूत है।

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मिसाल बन गई फुलमनी की कहानी
विश्व नर्स दिवस पर फुलमनी ब्राउद की कहानी इस बात का प्रमाण है कि नर्सें केवल मरीजों की देखभाल नहीं करतीं, बल्कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखती हैं। सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की त्रिवेणी फुलमनी आज उन सभी के लिए प्रेरणा हैं, जो चिकित्सा सेवा को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि मानवता की साधना समझते हैं।

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