राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बुधवार को तीन दिनी दौरे पर पटना पहुंचे। इस दौरान वे कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। कोविंद दो साल तक बिहार के राज्यपाल के रूप में पटना में रहे हैं। इस दौरे से उनके पुराने कार्यकाल की कई यादें ताजा होंगी। पटना एयरपोर्ट पर राज्यपाल फागू चौहान व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी अगवानी की। एयरपोर्ट से राष्ट्रपति सीधे राजभवन पहुंचे, जहां शाम को वह पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य जजों से मिलेंगे। बिहार विधानसभा सचिवालय के अनुसार गुरुवार को राष्ट्रपति विधानसभा भवन के शताब्दी समारोह में शामिल होंगे। इस ऐतिहासिक इमारत को बने 100 साल हो चुके हैं।
राज्य विधानसभा के स्पीकर ने कहा कि राष्ट्रपति के आगमन के अवसर पर गुरुवार शाम को एक रात्रिभोज का आयोजन किया जाएगा। इसमें राज्य के विभिन्न अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। स्थानीय प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति शुक्रवार को वापसी से पहले तख्त हरमंदिर पटना साहिब गुरुद्वारा, महावीर मंदिर, बुद्ध स्मृति पार्क व खादी मॉल जाएंगे। अधिकारी ने बताया कि कोविंद 15 अगस्त 2015 से 20 जून 2017 तक बिहार के राज्यपाल रहे।
बिहार का गौरवशाली इतिहास बताएगा शताब्दी स्तंभ
राष्ट्रपति कोविंद गुरुवार को विधानसभा में शताब्दी स्तंभ का शिलान्यास करेंगे। शताब्दी स्तंभ पर बिहार का गौरवशाली इतिहास दिखाया जाएगा। बिहार विधान सभा कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह बना। जिसमें जमींदारी उन्मूलन से लेकर शराबबंदी कानून तक लागू हुआ। इस भवन ने कई सरकारें, कई मुख्यमंत्री, कई विधानसभा अध्यक्ष देखे। आजादी के बाद सत्रहवीं विधानसभा आते-आते हजारों की संख्या में नए-पुराने सदस्यों को इसने पुष्पित-पल्लवित होते देखा।
1921 में लॉर्ड सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा ने किया था विस भवन का उद्घाटन
सात फरवरी 1921 को विधानसभा के मौजूदा भवन का उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल लॉर्ड सत्येन्द्र प्रसन्न सिन्हा ने किया था। 100 साल में इस भवन में कुछ विस्तार भी हुए, लेकिन इसकी मूल संरचना पर कोई असर नहीं पड़ा। निर्माण के मामले में अब भी यह कई नायाब नमूने को सहेजे हुए है, जो इसे विशिष्ट श्रेणी में खड़ा करता है। 1951 से बिहार में विधानसभा चुनाव की शुरुआत हुई थी। साल 2005 की फरवरी में हुए चुनाव में सरकार नहीं बन पाने के कारण अक्तूबर में फिर से चुनाव कराने पड़े थे। आजादी के बाद 1952 की पहली विधानसभा में 331 सदस्य बैठते थे जो 1977 में 324 हो गए। साल 2000 में बिहार के बंटवारे के साथ अलग राज्य झारखंड बना तो विधानसभा के सदस्य घटकर 243 रह गए।