विरोध-प्रदर्शन करते सीपीआई एमएल नेता तथा कार्यकर्ता
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बिहार के कैमूर में सीपीआई (एमएल) ने नीतीश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे नेताओं ने कहा कि इस बिहार सरकार में कैमूर में महादलितों पर किए जा रहे दबंगों और प्रशासन के अत्याचार के खिलाफ हम भभुआ शहर में विरोध मार्च निकाल रहे हैं। इसके बाद सीपीआई (एमएल) नेता-कार्यकर्ताओं ने शहर के एकता चौक पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंक कर बिहार सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह मार्च भभुआ ब्लॉक से निकालकर पूरे शहर में घुमाते हुए एकता चौक पर खत्म किया गया।
कॉमरेड के प्रांतीय सचिव अशोक बैठा ने बताया कि 16 नवंबर 23 को नुआंव प्रखंड के कम्हारी और करमहरी गांव के दलित-महादलित किसान द्वारा लगाए गए धान की फसल को काटा जा रहा था। तभी मोहनिया थाना पुलिस और स्थानीय दबंगों ने बिना कोई बात किए और जाति सूचक गलियां देते हुए दलित महिला-पुरुषों को जानलेवा मारपीट कर घायल कर दिया था।
उन्होंने बताया कि उसके बाद सभी घायलों ने अपना इलाज कराकर भभुआ एससी/एसटी थाने में आवदेन दिया था। जबकि इतने दिन बीत जाने के बाद भी एससी/एसटी थाने की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले को लेकर हम लोग कैमूर एसपी और डीआईजी से भी मिले। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर कार्रवाई हुई होती तो हमारे कॉमरेड संतोष मुसहर की हत्या नहीं हुई होती, जो कि पुलिस और दबंगों की मिलीभगत के कारण हत्यारे अभी भी फरार हैं।
अशोक बैठा ने आगे बताया कि इसके साथ ही आए दिन कहीं न कहीं दलितों पर अत्याचार हो रहा है। लेकिन इस बिहार सरकार में पुलिस और गुंडे-दबंगों का राज चल रहा है। दलित शोषित कुचले जा रहे हैं। इन्हीं सब सवालों को लेकर आज हम लोगों ने बिहार सरकार यानी नीतीश कुमार का पुतला दहन किया है। हम कहना चाहते हैं कि अगर बिहार सरकार दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है तो हम लोग सड़क से संसद तक आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएंगे।