बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफ़े के बाद रविवार को जद (यू) विधायक दल की बैठक होगी जिसमें नए नेता को चुना जा सकता है।
लोकसभा चुनाव में क़रारी हार की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने अपना पद छोड़ा है। वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ तिवारी ने बीबीसी को बताया कि नीतीश कुमार के इस्तीफे का फ़ैसला एक स्मार्ट फ़ैसला है और उन्होंने अपने इस क़दम से पार्टी में हो रहे विरोध का जवाब देने के साथ ही विपक्ष को भी जवाब दिया है जो उनसे इस्तीफे की माँग कर रहे थे।
माना जा रहा है कि नीतीश ने विपक्ष के इस दावे का भी जवाब दिया है जो ये कहते हैं कि जद (यू) के पचास विधायक उनके साथ है। कई हल्कों में नीतीश कुमार के इस्तीफे को सहानुभूति हासिल करने का प्रयास भी माना जा रहा है।
इससे पहले नीतीश कुमार ने इस्तीफ़े की घोषणा करते हुए कहा, "जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है, हम उसका सम्मान करते हैं।"
नीतीश कुमार ने भाजपा गठबंधन से अपना नाता तब तोड़ा था, जब भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को अपने प्रचार अभियान का नेतृत्व सौंपा था। बिहार में नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई थी।
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से नीतीश की पार्टी जद-यू के पास कुल 115 सीटें थीं। वहीं भाजपा के पास 89, लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल के पास 21 सीटें हैं। कांग्रेस के पास चार सीटें हैं।
बिहार में बहुमत के लिए 122 सीटें चाहिए। भाजपा से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने कांग्रेस एवं अन्य के समर्थन से विश्वासमत प्राप्त किया था।
वहीं भारतीय जनता पार्टी को आम चुनाव में अकेले दम पर बहुमत मिला है। उसे कुल 282 सीटों पर विजय हासिल हुई है। वहीं भाजपा गठबंधन एनडीए को 335 सीटें मिली हैं।