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मुखिया बनने के बाद आईएएस की पत्नी ने बदली पूरे गांव की तस्वीर, मिले कई पुरस्कार

Sun, 21 Jul 2019 01:13 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal
दुनिया में अपने लिए काम करने वाले बहुत लोग मिल जाएंगे, लेकिन जो समाज के लिए काम करें ऐसे लोगों की संख्या बेहद कम है। आज हम आपको ऐसी ही एक महिला की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के बल पर अपने पूरे गांव की तस्वीर ही बदलकर रख दी। हम बात कर रहे हैं, रितू जायसवाल की।
 
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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal
रितू आईएएस अफसर अरुण कुमार की पत्नी हैं और समाज की भलाई करने के लिए जानी जाती हैं। आज उनके गांव में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है, लेकिन अपने गांव की ऐसी तस्वीर बनाना उनके लिए इतना  आसान नहीं था। कहानी शुरू होती है, रितू के अपने ससुराल आने से।
 
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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal
जब वह शादी के 15 साल बाद अपने ससुराल आईं तो वह गांव का पिछड़ापन देखखर काफी परेशान हो गईं। ना तो गांव में बिजली थी और ना सड़क। रितू से ये सब देखा ना गया, और उन्होंने गांव को इस पिछड़ेपन से निकालने का ठान लिया। रितू ने मुखिया बनने के बाद गांव के विकास के लिए काफी काम किया। यही कारण है कि अब गांव में उन्हें बेटी जैसा प्यार मिल रहा है। 

 

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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal

आसान नहीं था सब पाना

रितू बिहार के सीतामढ़ी जिले के सिंघवाहिनी पंचायत की मुखिया हैं। सड़क बनाने के लिए लोग अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन उन्हें बड़ी मशक्कत के बाद मनाया गया। रितू विकास के सभी कामों की निगरानी खुद करती हैं। इस दौरान वह कभी बाइक चलाती दिखती हैं, तो कभी ट्रैक्टर और जेसीबी पर सवार दिखती हैं।

 

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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal

शादी के 15 साल बाद आईं गांव

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रितू ने बताया कि उनकी शादी साल 1996 में हुई थी। उनके पति 1995 बैच के आईएएस (अलायड) अरुण कुमार हैं। शादी के 15 साल तक जहां भी उनके पति की पोस्टिंग होती थी, वह साथ जाती थीं। लेकिन 15 साल बाद उन्होंने अपने पति से ससुराल जाने की बात की और उनके घर के सभी लोग नरकटिया गांव जाने के लिए तैयार हो गए।
 
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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal
तभी रास्ते में गांव पहुंचने से कुछ दूरी पर उनकी गाड़ी कीचड़ में फंस गई। जब काफी कोशिशों के बाद भी गाड़ी कीचड़ से नहीं निकली तो बैलगाड़ी पर सवार होना पड़ा। लेकिन कुछ देर जाते ही वो भी कीचड़ में फंस गई। जिसके बाद रितू उस क्षेत्र का विकास करने के लिए प्रेरित हुईं।

 

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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal

गांव की लड़कियों को पढ़ाया

रितू ने विकास की शुरुआत गांव की लड़कियों को पढ़ाने से की। साल 2015 में नरकटिया गांव की 12 लड़कियों ने पहली बार मैट्रिक की परीक्षा पास की। फिर 2016 में रितू ने सिंहवाहिनी पंचायत से मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ा। रितू के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए 32 उम्मीदवार थे। जिसमें उन्हें जीत मिली।
 

 

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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal

कई परेशानियां आईं

गांव की मुख्य सड़क बनाने के लिए टेंडर हुआ था, जिसमें कुछ असामाजिक तत्वों ने अड़ंगा लगाया। जिसके कारण टैंडर रद्द हो गया। लेकिन इसके बाद सड़क के लिए जल्द ही काम शुरू हो गया। लेकिन सड़क के लिए जमीन की जरूरत थी, जिसे गांव वाले छोड़ने के लिए नहीं मान रहे थे। रितू ने इसके लिए लोगों को मना लिया।
 

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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal
उन्होंने लोगों को बताया कि अगर सड़क नहीं बनेगी तो गांव का विकास कैसे होगा। बच्चे कैसे गांव से बाहर जाएंगे, खेती का सामान अगर बाजार में बेचा जाए तो और अधिक पैसा मिलेगा। साथ ही गांव के बीमार लोगों को भी इलाज के लिए गांव के बाहर ले जाया जा सकेगा। इन बातों का असर गांव वालों पर हुआ और वो अपनी जमीन छोड़ने के लिए राजी हो गए।
 

 

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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal

पूरे गांव में पहुंची बिजली

सिंघवाहिनी पंचायत 2016 में खुले में शौच से मुक्त हो गया था। इस पंचायत में कुल सात टोले हैं, जिनमें से कई में पीसीसी सड़क बन गई है। अब गांव में बिजली भी पहुंच गई है। गांव में बच्चों का समूह बनाकर उन्हें मुफ्त में शिक्षित किया जा रहा है। उन्हें पढ़ाने वाली भी गांव की ही लड़कियां हैं। रितू का कहना है कि उन्होंने पहले 20 लड़कियों को प्रशिक्षित किया था।
 
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रितू जायसवाल - फोटो : facebook/Ritu Jaiswal
क्योंकि लोगों को अकेले जागरुक करना उतना आसान नहीं है। अब ये लड़कियां बाकी बच्चों को कंप्यूटर सिखा रही हैं। कई लड़कियां ऐसी भी हैं, जो महिलाओं को सिलाई और कढ़ाई सिखा रही हैं। जिसके लिए सरकार से लेकर एनजीओ तक की मदद मिल रही है। बता दें अपने इन्हीं कड़े प्रयासों के कारण रितू को उच्च शिक्षित मुखिया का अवॉर्ड मिल चुका है। साथ ही उन्हें पंचायत के विकास के लिए भी कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।

रितू को पंचायत में बेहतर काम के लिए दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने 'चैंपियंस ऑफ चेंज अवार्ड' से भी नवाजा है। ये कार्यक्रम इंटरेक्टिव फोरम ऑन इंडियन इकोनॉमी ने आयोजित किया था।
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