Nitish Kumar : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे जदयू के पूर्व एमएलसी रणवीर नंदन ने भाजपा में जाने की तैयारी कर ली है। जदयू अध्यक्ष ललन सिंह से विवाद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ी थी, हालांकि कुछ देर बाद उनका निष्कासन-पत्र भी जारी हुआ था।
पिछले 27 सितंबर को जनता दल यूनाईटेड की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले पूर्व एमएलसी और सीएम नीतीश कुमार के करीबी प्रो. रणबीर नंदन जल्द ही भाजपा के साथ नजर आने वाले हैं। पार्टी से इस्तीफा देने के 15 दिन बाद वह भाजपा ज्वाइन करेंगे। प्रो. रणवीर नंदन शिक्षाविद् हैं। 11 अक्टूबर को भाजपा कार्यालय में मिलन समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। बिहार भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाएगी। जदयू को पटना विश्वविद्यालय में पहली बार छात्र संघ का चुनाव जिताने के लिए रणनीति तैयार करने वालों में प्रो. रणवीर नंदन सबसे आगे रहे। इसके अलावा पटना की राजनीति कायस्थ वोटरों के आसपास घूमती है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए कायस्थों को समेटने में प्रो. नंदन की अहम भूमिका रही।
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पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का लगा था आरोप
बता दें कि प्रो. रणवीर नंदन द्वारा पार्टी से इस्तीफा देते ही जदयू की ओर से निष्कासन का आदेश जारी किया गया था। प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के हस्ताक्षर से यह निष्कासन का आदेश जारी किया। इसमें बताया गया है कि पार्टी विरोधी बयानों के कारण प्रो. रणवीर नंदन को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया जा रहा है। इसके बाद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा था कि वह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहते थे।
पूर्व एमएलसी राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बेइज्जत करने का ठेका लिए बैठे हैं
प्रो. रणवीर नंदन ने 'अमर उजाला' को बताया- "पहले से ऐसा कुछ नहीं था, हालांकि परिस्थितियां जरूर विपरीत थीं। विधान पार्षद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बनाया था। वह सम्मान था। टिकट नहीं मिलने के कारण पार्टी छोड़ने का सवाल नहीं उठा, क्योंकि सीएम के प्रति आस्था में कोई कमी नहीं आयी। लेकिन, जब प्रतिष्ठा पर चोट लगे तो कैसे संभव है कि टिका जाए। आज राष्ट्रीय अध्यक्ष से बात हो रही थी तो उन्होंने बात-बात में ही कह दिया कि पार्टी में रहना है तो रहिए और निकलना है तो निकल लीजिए। मुख्यमंत्री के प्रति सम्मान में कमी न आयी है, न आएगी; लेकिन पार्टी में अपमान के बाद बने रहना ठीक नहीं देख इस्तीफा भेज दिया। पार्टी के इस नेतृत्व में वापसी संभव नहीं है। यह अपमान मेरा भले ही पहली और अंतिम बार हुआ है, लेकिन पार्टी के कई नेताओं को मैं मौजूदा अध्यक्ष से अपमान सहता देख रहा हूं। एक आम नेता से ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती और यहां तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बेइज्जत करने का ठेका लिए बैठे हैं। ललन सिंह को यह सोचना चाहिए कि मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के साथ ही देशभर के दलों को जोड़ने की मुहिम चला रहे और यह तोड़ने की साजिश रच रहे।"