पटना के डाक बंगला चौराहे पर रामविलास पासवान और चिराग पासवान की बड़ी-बड़ी तस्वीरों वाली होर्डिंग लगी है। होर्डिंग में बड़े बड़े अक्षरों में लिखा है, ‘ये चिराग है जो, हर घर को रोशन करेगा।’ लेकिन राजधानी से करीब 150 किलोमीटर दूर जमुई में जहां से चिराग ने पिछला चुनाव जीतकर लोकसभा में एंट्री की थी, वहां यह सवाल हर कोई एक दूसरे से पूछ रहा है, कहां है चिराग।
अपने ही लोकसभा क्षेत्र में चिराग पासवान और उनकी पार्टी को एनडीए से कुछ खास तवज्जो नहीं मिली है। जदयू से भाजपा में आए नरेंद्र सिंह के बेटे अजय प्रताप यहां से चुनाव मैदान में है।
नरेंद्र लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और पासवान के भरोसेमंद भी। लेकिन, बाद में वह नीतीश की टीम का हिस्सा बन गए थे। नीतीश ने उन्हें कृषि मंत्री बनाया था। हालांकि इस बार के चुनाव में वह भाजपा का झंडा थामे हैं। उनके दो बेटे जमुई संसदीय क्षेत्र की विधानसभा सीटों से खड़े हैं।
अजय प्रताप को तो जमुई से भाजपा ने टिकट दे दिया लेकिन लोजपा के विरोध के चलते उनके दूसरे बेटे सुमित कुमार को चकाई से पार्टी का टिकट नहीं मिला। एनडीए के सीट बंटवारे में चकाई सीट लोजपा के हिस्से में आई।
बावजूद इसके नरेंद्र के बेटे सुमित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में न केवल डटे हैं बल्कि पिता की ताकत की वजह से मजबूत भी माने जा रहे हैं। कुल मिलाकर जमुई संसदीय सीट का सांसद होने के बावजूद चिराग अपने दल के लिए अपने क्षेत्र में महज दो सीट का टिकट हासिल कर पाए। चकाई और सिकंदरा।
नरेंद्र के प्रभाव की वजह से जहां चकाई में जीत उनके लिए आसान नहीं वहीं सिकंदरा में उनके उम्मीदवार के भविष्य को लेकर कुछ साफ तस्वीर नहीं बन रही।