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Bihar Politics: प्रशांत किशोर ने किया तंज; कहा- लालू-नीतीश के बीच संबंध कितने अच्छे, ये हमसे ज्यादा कौन जानता

Wed, 06 Dec 2023 07:55 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा

सार

Prashant Kishor taunt on Lalu And Nitish: जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने बुधवार को दरभंगा जिले के तारालाही गांव में पदयात्रा निकाली। इस दौरान उन्होंने सीएम नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमों लालू यादव पर जमकर हमला किया। दोनों राजनितीज्ञों के संबंधों पर चुटकी ली।
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दरभंगा में पदयात्रा के दौरान जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने बुधवार को दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के तारालाही गांव में पदयात्रा की। इस दौरान प्रशांत किशोर ने तंज कर कहा कि नीतीश कुमार के विषय में अभी हमसे से ज्यादा कोई नहीं जानता है। नीतीश जी को यह समझ नहीं है कि आपने महागठबंधन बनाया और अगर आप लोकसभा का चुनाव हारेंगे तो आपका दल भी नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि लालू और नीतीश एक-दूसरे को कितना चाहते हैं, यह बात तो हम जानते हैं। इसका कारण उन्होंने बताया कि 2015 हम ही दोनों को एक साथ लाए थे।

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'लालू के साथ मिलकर जंगलराज लाने में लगे नीतीश'
प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार एक ऐसे आदमी हैं जिनको बिहार की जनता ने सिर्फ 42 सीटों पर जिताया। अब वे जनता को सबक सिखाने के लिए लालू यादव के साथ मिलकर जंगलराज लाने की कोशिश में लगे हैं। अगर जंगलराज आ गया तो लोग कहेंगे कि बेकार में ही नीतीश कुमार को हटाया, वही ठीक था। उससे बुरी सरकार आ जाए तभी तो लोग कहेंगे कि नीतीश कुमार की सरकार ही ठीक थी।

सीएम नीतीश का बताया डर
नीतीश कुमार के महागठंबधन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने गठबंधन इसलिए बनाया क्योंकि उन्हें डर इस बात का है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा वाले मुख्यमंत्री पद से हटा देंगे। इस कारण वे पहले ही भाजपा को छोड़कर राजद के साथ चले गए कि अभी कम से कम 2025 तक मुख्यमंत्री की कुर्सी उनके पास बरकरार रहेगी।
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जन सुराज पदयात्रा के बताए तीन उद्देश्य
प्रशांत किशोर ने जन सुराज पदयात्रा के तीन उद्देश्यों को बताया। उन्होंने कहा कि पदयात्रा का पहला उद्देश्य गांव-गांव जाकर लोगों को ये समझाना है कि अगर आप समस्याओं से निपटारा चाहते हैं, तो वोट आप चाहे किसी को दें, लेकिन वोट अपने बच्चों के लिए दें। मैं आठ से 10 जगहों पर नुक्कड़ सभाएं रोज करता हूं।

दूसरा उद्देश्य ये है कि विकल्प के अभाव में गलत लोगों को वोट न दें। इसलिए बेहतर विकल्प बनाया जाए। बिहार में आंकड़े बताते हैं कि आधे से ज्यादा लोग चाहते हैं कि नया विकल्प बनना चाहिए। वह कोई पार्टी, कोई व्यक्ति, समूह न बनाए बल्कि बिहार के सारे लोग मिलकर उस विकल्प को बनाएं। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधियों के पास जब तक बिहार को सुधारने की योजना न हो, तब तक बिहार का विकास नहीं हो सकता।

पदयात्रा का तीसरा उद्देश्य है कि बिहार की हर पंचायत के लिए अगले 10 साल की योजना बना रहे हैं। ताकि अगले 10 वर्ष में बिहार के हर पंचायत को विकसित कर सकें। पदयात्रा के दौरान मैं देख रहा हूं कि गांवों में स्कूल नहीं हैं, अस्पताल नहीं हैं, पेयजल की समस्या और सड़क नहीं हैं। इस पर चर्चा होती है, हम जो योजना बना रहे हैं। उसमें पंचायत स्तर पर पढ़ने की अच्छी व्यवस्था कैसे की जाए, दूसरा हर पंचायत में 800-1200 रोजगार के नए अवसर कैसे पैदा किए जाएंगे। तीसरा उस पंचायत में होने वाली खेती और किसानों की दशा को कैसे सुधारा जाए, इन पर काम कर रहे हैं।

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