राजभवन मार्च के लिए निकले उपेन्द्र कुशवाहा
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जातीय गणना के आंकड़े प्रकाशित होने के बाद उपेन्द्र कुशवाहा ने जाति जनगणना के आंकड़ों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। वह अपने समर्थकों के साथ
राजभवन मार्च के लिए गांधी मैदान से निकले लेकिन उन सब को पटना पुलिस ने डाक बंगला चौराहा पर रोक दिया। पटना पुलिस ने विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए उपेंद्र कुशवाहा के काफिले को डाक बंगला चौराहे से आगे नहीं बढ़ने दिया। उसके बाद उपेंद्र कुशवाहा अपने समर्थकों और वरीय नेताओं के साथ बीच चौराहे पर ही बैठ गए और महागठबंधन सरकार के विरोध में नारेबाजी करने लगे। उपेन्द्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विरोध करते हुए कहा कि जातीय गणना में सभी जाति का आंकड़ा जानबूझकर गलत बताया गया है। चुनावी लाभ पाने के लिए नीतीश कुमार ने कुशवाहा समाज समेत कई जातियों का गलत आंकड़ा पेश किया है। जातियों की संख्या के साथ छेड़खानी की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सर्वे टीम ने घर में ही बैठकर जाति जनगणना का आंकड़ा पेश किया है, इसलिए हमारी मांग है कि फिर से सर्वे कराया जाए और जातीय गणना के आंकड़े को सही ढंग से पेश किया जाए।
मेरा दावा है आंकड़ा गलत है
उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि मेरा दावा है कि आंकड़ा गलत है। उन्होंने कहा कि किसी से पूछ कर संपत्ति का आंकड़ा कैसे जुटाया जा सकता है। परिवार में कितने सदस्य हैं यह बात गांव का लोग बत्रा देगा। कोई परिवार किस जाति का है यह भी गांव वाला बता देगा लेकिन उनकी कितनी संपत्ति है? उसके कहाँ कहाँ क्या क्या व्यवसाय और कहाँ कहाँ उसके अन्य घर मकान हैं. यह कोई दूसरा व्यक्ति कैसे बता सकता है? और जब इस तरह का आंकड़ा नहीं जुटाया ही नहीं गया तो यह आंकड़ा सही कैसे हो गया। सरकार के द्वारा दिया गया आंकड़ा सही नहीं है यह मेरा दावा है।
महामहिम इसमें हस्तक्षेप करें
उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि जाति जनगणना का जो आंकड़ा प्रकाशित किया गया है वह घर में बैठकर बना लिया गया है। इसको लेकर हर जगह से शिकायत मिल रही है कि उनके गांव में कोई गया ही नहीं। उनके यहां जाकर किसी ने कुछ पूछा ही नहीं। ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट है कि घर में बैठकर आंकड़ा बनाया गया जो कहीं से दुरुस्त नहीं हो सकता है। उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि यह सिर्फ जातीय गिनती का सवाल नहीं है आर्थिक सर्वे करने की भी बात कही जा रही है। लेकिन असल में आर्थिक सर्वे तो और भी मुश्किल है। परिवार के सदस्यों की गिनती कोई भी बता देगा लेकिन किसके कितने बैंक खाते हैं और किन खातों में कितना रुपया है यह कोई भी कैसे बता देगा। गांव से बाहर किसकी कितनी संपत्ति है यह कौन बताएगा। यह आंकड़ा तो वही बताया जिसकी संपत्ति है। और जब ऐसा कोई सर्वे हुआ ही नहीं तो फिर कैसे इनका आंकड़ा सही हो जाएगा। इसी की सुधार के लिए राज्य सरकार से हमारी मांग है कि सरकार पर ध्यान दे। हम महामहिम राज्यपाल महोदय से जाकर मिलेंगे और कहेंगे कि आप इसमें हस्तक्षेप कीजिए।