घटनास्थल पर जुटे स्थानीय लोग और रेलवे पुलिस
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बिहार में मास सुसाइड, यानी सामूहिक आत्महत्या की खबर बेहद असामान्य है। लेकिन, यह घटना पूरे सिस्टम को झकझोर देने वाली है। एक महिला बीमार पड़ी और उसे इलाज नहीं मिला। मौत हो गई। फिर उसी महिला की बेटी के लकवा, यानी पैरेलिसिस को ठीक करने में परिवार कंगाल हो गया। बर्बाद हो गया। सरकारी सिस्टम से कोई नहीं जागा। जब बेटी भी नहीं बची तो पिता ने सदमे में एक बड़ा फैसला लिया और उसमें दोनों बेटों ने भी साथ दिया। वह फैसला कतई अच्छा नहीं कहा जा सकता। लेकिन, तीनों ने ट्रेन के सामने एक साथ कूदकर जान दी तो हर कोई हिल गया। अब न तो परिवार में कोई रोने वाला है और न कोई सिस्टम से इन सारे दर्द का मुआवजा मांगने वाला।
पिता अपने दो बेटों के साथ दिया घटना को अंजाम
मामला गोपालगंज का है, जहां बेटी की मौत से आहत होकर उस परिवार के तीन लोगों ने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी है। मृतकों की पहचान रामसूरत महतो, इनके पुत्र सचिन कुमार और दीपक कुमार में रूप में की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि रामसूरत चौहान की बेटी सुभावती कुमारी लकवा से पीड़ित थी जिसका इलाज कराने में वह परिवार अपना सब कुछ गंवा बैठा था। फिर भी जब लड़की ठीक नहीं हुई। इस वजह से घर के सभी लोग बहुत परेशान रहते थे। अंत में दो दिन पहले उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत से आहत होकर रामसूरत चौहान ने अपने बेटों के साथ सुसाइड करने का फैसला लिया। आज रामसूरत महतो सुभावती का शव घर में ही छोड़कर अपने दोनों बेटों के साथ चंदन टोला के पास थावे-छपरा पैसेंजर ट्रेन से कटकर जान दे दी। इस घटना के बाद अब पूरा परिवार समाप्त हो गया। रामसूरत महतो के परिवार में अब कोई बचा नहीं है, जो घटना की वजह बता सके, क्योंकि उसकी पत्नी की पहले ही बीमारी से मौत हो चुकी है। एक बेटा दिव्यांग है और दूसरा बेटा सूरत में काम कर रहा था जिससे पूरे परिवार का भरण पोषण चलता था।
जांच में जुटी पुलिस
गोपालगंज के प्रभारी डीएम अभिषेक कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। सदर एसडीपीओ प्रांजल के नेतृत्व में पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंच कर जांच शुरू कर दी है।