बिहार में शराबबंदी के बावजूद यहां जहरीली शराब पीने से अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है। इसको लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। वहीं, शनिवार को बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने राज्य में शराबबंदी कानून को फेल बताया। उन्होंने बिहार पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं और पुलिसकर्मियों को शराब माफिया का सहयोगी बताया है।
विस्तृत समीक्षा करने की दरकार
प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि शराबबंदी कानून को लेकर विस्तृत समीक्षा करने की दरकार है। जायसवाल ने कहा कि बिहार के कई इलाकों में शराब की बिक्री हो रही है। स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण शराब पीने-पिलाने का दौर जारी है। इसके साथ ही जायसवाल ने जहरीली शराब पीने के चलते हुई मौतों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू किए पांच साल पूरे हो चुके हैं। इसकी सफलता और असफलता पर विचार करना आवश्यक है।
शराबबंदी लागू है, लागू रहेगा: जदयू
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने शनिवार को पत्रकारों से कहा, 'शराबबंदी कानून लागू है और लागू रहेगा। जो डेथ हो रही है उसकी जांच हो रही है। गोपालगंज में जहरीली शराब कांड हुआ था, कितने लोगों की सजा हुई। उदाहरण सबके सामने है। हत्या के लिए कानून फांसी बना हुआ है। फिर भी लोग हत्या करते हैं ना। गिरफ्तार होते हैं तो फांसी होती है। कानून का उल्लंघन कीजिएगा फांसी होगी सजा होगी। जो कानून में प्रावधान है वह लागू होगा।' वहीं, जदयू प्रवक्ता निखिल मंडल ने संजय जायसवाल के बयान पर कहा कि निश्चित तौर पर 16 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो समीक्षा बैठक करने जा रहे हैं, उसमें शराबबंदी कानून में और क्या बदलाव लाए जा सकते हैं, जागरूकता के लिए क्या कुछ किया जा सकता है इस पर विचार करेंगे।
जनवरी से अब तक 70 से अधिक लोगों की मौत
बिहार में जहरीली शराब पीने से जनवरी से लेकर अबतक 70 से अधिक लोगों की मौत हुई है। ये सभी मौतें नवादा, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीवान, रोहतास जैसे जिलों में हुई हैं। वहीं कई जगहों पर नकली शराब के सेवन से लोगों की आंखो की रौशनी तक चली गई है। बता दें कि नितीश सरकार ने पांच अप्रैल 2016 को बिहार में शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।