राज्य में शराब पर प्रतिबंध को लेकर लगातार सख्त रुख दिखा रही नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं चाहती है। सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के बाद अब निजी क्षेत्र में भी इसे लेकर फैसले लिए जा रहे हैं और शराबियों को नौकरी नहीं देने का कदम भी उठाया जा सकता है।
राजधानी पटना में अधिकारियों ने इसे लेकर होटल और निजी क्षेत्र से जुड़े कुछ अन्य लोगों के साथ बैठक की है और रणनीति तैयार की है। अधिकारियों ने बताया कि निजी क्षेत्र के लोगों से कहा गया है कि शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए शराबियों को नौकरीं पर न रखें। सभी जिलों में अलग-अलग रणनीतियां तय की जा रही हैं।
पटना में इसे लेकर कमिश्नर संजय कुमार अग्रवाल और आईजी संजय सिंह ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों समेत अन्य अधिकारियों के साथ होटल-रेस्तरां संचालकों के साथ एक बैठक की है। इस बैठक में साफ-साफ निर्देश दिया गया कि ऐसे लोगों को नौकरी पर कतई न रखा जाए जो पहले शराब पीते रहे हैं।
26 नवंबर को शराब का सेवन न करने की ली जाएगी शपथ
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को एलान किया था कि बिहार सरकार के कर्मचारी और राज्य के लोग 26 नवंबर को 'प्रतिबंध दिवस' के अवसर पर शपथ लेंगे कि वह शराब का सेवन नहीं करेंगे। सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को यह निर्देश दिया गया है कि शराब पर प्रतिबंध को पूरे प्रदेश में उचित तरीके से लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि 26 नवंबर को प्रतिबंध दिवस के मौके पर राज्य के सभी लोग ये शपथ लेंगे कि न तो वह खुद शराब का सेवन करेंगे और न ही इसकी बिक्री होने देंगे। वहीं, शादियों में पुलिस की छापेमारी को लेकर उन्होंने कहा था कि पुलिस को शिकायत मिली थी कि शादी में शराब पिलाई जा रही है। ऐसे में वह कार्रवाई करेगी।
पटना में बीते चंद दिनों में 60 से अधिक जगहों पर छापेमारी
अधिकारियों के अनुसार पटना पुलिस ने पिछले कुछ दिनों में 60 से अधिक होटलों और मैरिज हॉल में छापेमारी की है। इस दौरान कुछ लोगों को शराब का सेवन करने और शराब उपलब्ध कराने के आरोपों में गिरफ्तार भी किया गया है। पुलिस की इन छापेमारियों को लेकर विपक्षी नेताओं की ओर से कई सवाल भी उठाए गए हैं।