कार और बाइक खरीदने के बाद सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाले पार्ट्स में से एक टायर होते हैं। अगर इनका ध्यान सही तरीके से रखा जाए तो ये लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के साथ निभाते हैं।
कार और बाइक से बिना परेशानी और बेहतरीन सफर के लिए टायर्स का सही होना भी काफी जरूरी होता है। अगर इनकी समय पर देखभाल ना की जाए तो बीच रास्ते टायर खराब होने पर बड़ी परेशानी होती है साथ ही हादसे की आशंका भी होती है। हम इस खबर में आपको टायर्स के सही रखरखाव की जानकारी दे रहे हैं।
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ना करें ओवरलोडिंग
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- फोटो : सोशल मीडिया
कार हो या बाइक। कभी-भी ओवरलोडिंग नहीं करनी चाहिए। ओवरलोडिंग के कारण जहां कार के इंजन पर बुरा असर होता है वहीं वाहन के टायर को भी सबसे ज्यादा नुकसान होता है। टायर ही वाहन में ऐसा हिस्सा होते हैं जो सड़क से सीधे संपर्क में होते हैं। ऐसे में ज्यादा भार डालने पर टायर पर भी ज्यादा भार आ जाता है। ज्यादा वजन के कारण टायर जल्दी घिसते हैं और कई मामलों में तो टायर फटने का खतरा भी हो जाता है। बीच सफर में अगर टायर फट जाए तो फिर गंभीर हादसा भी हो सकता है।
टायर में हमेशा सही दबाव में हवा का होना जरूरी होता है। टायर में हवा कम हो जाए तो भी और ज्यादा हो जाए तो भी परेशानी होती है। टायर में हवा कम होने पर एवरेज कम हो जाता है और टायर कटने का खतरा भी बना रहता है। टायर में कम हवा के अलावा ज्यादा हवा के भी नुकसान हैं। टायर में ज्यादा हवा होने के कारण सड़क पर पकड़ कम हो जाती है। ऐसे में हादसा होने का खतरा भी होता है। इसलिए टायर में हमेशा सही हवा का दबाव होना जरूरी होता है।
जब भी घर से निकलें तो टायर में हवा चेक करने के बाद ही निकलें। अगर हवा कम है तो उसे भर लें और अगर ज्यादा है तो मशीन के जरिए उसे निकाल दें। कभी-भी लंबी दूरी तय करने के बाद टायर में हवा डलवाने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादा चलने पर टायर गर्म हो जाते हैं और हवा डलवाने पर नुकसान भी होता है।
कोशिश करनी चाहिए कि कार में जब भी हवा भरवाएं तब नाइट्रोजन गैस को डलवाएं। नाइट्रोजन गैस सामान्य गैस की तुलना में बेहतर होती है और इसे डलवाने पर कार के टायर ज्यादा चलने के बाद भी आसानी से गर्म नहीं होते। नाइट्रोजन वैसे तो सभी मौसम में फायदेमंद होती है लेकिन इसका सबसे ज्यादा फायदा गर्मी के मौसम में होता है।
कार में चार टायर होते हैं। इन टायर्स को हमेशा एक्स वर्ड की शेप में हर पांच हजार किलोमीटर पर बदल देना बेहतर होता है। ज्यादातर कारों में आगे के पहियों पर ज्यादा वजन और पावर होती है इसलिए पीछे के टायर की तुलना में आगे के टायर ज्यादा जल्दी घिसते हैं। अगर कार के टायरों को नियमित अंतराल के बाद एक्स वर्ड की शेप में बदला जाए तो इससे उन्हीं टायरों के साथ कार को ज्यादा समय तक चलाया जा सकता है।