मारुति सुजुकी की ओर से फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली पहली कार को दिखाया गया है। मारुति के अलावा और किस कंपनी की ओर से फ्लेक्स फ्यूल वाली कार भारत में सबसे पहले लाया जा सकता हैं। आइए जानते हैं।
देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता मारुति की ओर से फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली कार को दिखाया गया है। हालांकि मारुति से पहले टोयोटा की ओर से फ्लेक्स फ्यूल वाली कार को भारतीय बाजार में दिखाया जा चुका है। किन कंपनियों की कारों में यह तकनीक दी जाएगी। इसकी जानकारी हम इस खबर में आपको दे रहे हैं।
टोयोटा के बाद मारुति की ओर से फ्लेक्स फ्यूल कार को लाने की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है। कंपनी ने हाल में इस तकनीक से लैस पहली कार को दिखाया है। हालांकि अभी यह सिर्फ प्रोटोटाइप है, लेकिन जरूरी टेस्ट के बाद इस तकनीक वाली कारों को कंपनी की ओर से बाजार में उतारा जा सकता है। मारुति की ओर से जिस कार में इस तकनीक को लगाया गया है, वह वैगन आर कार है। भारत में यह कार सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली कारों में शामिल है। जानकारी के मुताबिक कंपनी सबसे पहले इसी कार के साथ फ्लेक्स फ्यूल सेगमेंट में एंट्री कर सकती है। इसके बाद ही अन्य कारों में भी कंपनी इस तकनीक को ला सकती है।
कंपनी की ओर से वैगन आर के जिस प्रोटोटाइप को दिखाया गया है। वह ई20 से लेकर ई85 तक के ईथेनॉल वाले मिश्रित पेट्रोल से चलाई जा सकती है। इस तकनीक को सुजुकी जापान के साथ मिलकर भारत में ही डेवलप किया गया है।
मारुति ओर से फ्लेक्स फ्यूल कार की जानकारी में बताया गया है कि इस कार में ईथेनॉल के लिए एक सेंसर भी लगाया गया है जो ई20 और ई85 ईंधन को कार के अनुकूल बनाएगा। इसके साथ ही इस कार को देश के बेहद ठंडे इलाकों में भी चलाने के लिए बनाया गया है। ठंडे इलाकों में कार चलाने के समय ईंधन ना जमे इसके लिए इसमें ईंधन को गर्म करने के लिए हीटर भी दिया गया है। जिसके बाद इस कार को आसानी से माइनस 10 से 15 डिग्री के तापमान में भी चलाया जा सकता है। इसके अलावा इसके कई खास पार्ट्स को स्टैंडर्ड वाहन के मुकाबले ज्यादा बेहतर बनाया गया है।
मारुति सुजुकी के एमडी और सीईओ हिसाशी टेकुची ने बताया कि कंपनी तेल आयात कम करने और पर्यावरण के सुधार की दिशा में लगातार काम कर रही है। सीएनजी के साथ ही कंपनी अब फ्लेक्स फ्यूल कार को तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस ईंधन से चलने वाली वैगनआर 79 फीसदी तक कम उत्सर्जन करती है। जबकि इसकी ताकत में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा।