अगर आप भी पेट्रोल बचाने के लिए बाइक या स्कूटर में कुछ खास तरह की सेटिंग करवाते हैं। तो इससे काफी नुकसान हो सकता है। दो पहिया वाहन में क्या नुकसान हो सकते हैं। आइए जानते हैं।
देशभर में पेट्रोल की कीमतों में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में बाइक और स्कूटर चलाने वालों को अपनी बचत का बड़ा हिस्सा पेट्रोल पर खर्च करना पड़ता है। हम इस खबर में आपको बता रहे हैं कि स्कूटर या बाइक में कुछ खास तरह की सेटिंग करवाने के बाद आपको कितना बड़ा नुकसान हो सकता है।
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करवाते हैं सेटिंग
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
कई लोग अपनी बाइक और स्कूटर से ज्यादा एवरेज लेने के लिए कुछ खास तरह की सेटिंग करवा देते हैं। मेकैनिक से कहकर कार्बोरेटर को ट्यून करवा दिया जाता है। जिससे जरूरत से कम मात्रा में ईंधन इंजन तक पहुंचता है और इससे एवरेज में बढ़ोतरी हो जाती है। लेकिन इससे कई परेशानियां भी सामने आने लगती हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर कोई भी व्यक्ति अपने वाहन में इस तरह की सेटिंग करवाता है, तो उससे कई बार बाइक या स्कूटर को स्टार्ट करने में परेशानी होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इंजन में जरूरी मात्रा में जाने वाले पेट्रोल को कम कर दिया जाता है। ठंड के मौसम में तो सबसे ज्यादा परेशानी सामने आती है, जब कम तापमान में रातभर घर के बाहर खड़ी बाइक या स्कूटर को सुबह स्टार्ट किया जाता है।
एक बार इस तरह की सेटिंग करवाने के बाद भले ही बाइक या स्कूटर से आपको ज्यादा एवरेज मिले। लेकिन इसका बुरा असर ट्रैफिक के दौरान बाइक या स्कूटर के इंजन पर होता है। कार्बोरेटर को ट्यून करवाने के बाद काफी कम मात्रा में पेट्रोल इंजन तक जाता है। जिससे गाड़ी को स्टार्ट रखने और जाम की स्थिति में बंद रखने से बचाने के लिए बार बार एक्सलेरेटर देने की जरूरत होती है। इस स्थिति में आपको ज्यादा परेशानी हो सकती है।
इंजन को ट्यून करवाने का सबसे खराब नतीजा इंजन का सीज होना होता है। अगर बाइक या स्कूटर से ज्यादा एवरेज चाहने के कारण ट्यूनिंग के साथ छेड़छाड़ की जाती है तो इंजन तक पेट्रोल काफी कम मात्रा में पहुंच पाता है। इस कारण बाइक या स्कूटर के इंजन को क्षमता से ज्यादा काम करना पड़ता है। जिससे इंजन जरूरत से जल्दी गर्म हो जाता है। जल्दी गर्म होने और देर तक तापमान ज्यादा रहने के कारण इंजन के अंदरूनी पार्ट्स को ज्यादा नुकसान होता है, जिससे इंजन सीज तक हो सकता है। एक बार इंजन सीज हो जाए तो फिर उसे ठीक करवाने में बड़ी मात्रा में पैसा और समय देना पड़ता है।