वास्तविक प्रदूषण के आधार पर फिटनेस हो तय
दिल्ली सरकार की याचिका में कहा गया है कि वाहन की उम्र नहीं, बल्कि उसका असली प्रदूषण स्तर उसकी फिटनेस का आधार होना चाहिए। इसके लिए वैज्ञानिक जांच और मानकों की जरूरत है। सरकार चाहती है कि केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक विस्तृत अध्ययन करें, जिससे यह पता लगाया जा सके कि उम्र आधारित रोक ज्यादा प्रभावी है या फिर प्रदूषण स्तर आधारित नीति।
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एनजीटी का सख्त निर्देश और सुप्रीम कोर्ट की मुहर
गौरतलब है कि एनजीटी ने अपने 26 नवंबर 2014 के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल या डीजल वाहन सड़कों पर नहीं चल सकते। इतना ही नहीं, ऐसे वाहन सार्वजनिक स्थानों पर पार्क भी नहीं किए जा सकते। अगर किसी भी प्रकार का पुराना वाहन देखा जाता है, तो उसे जब्त करने और मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।
सभी प्रकार के वाहनों पर लागू है नियम
यह प्रतिबंध दोपहिया, तिपहिया, चार पहिया, हल्के और भारी सभी वाहनों पर लागू होता है, चाहे वे निजी हों या कमर्शियल। कोर्ट ने साफ कर दिया था कि इसमें कोई छूट नहीं दी जाएगी।
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खेतो में एकत्रित पराली में लगी आग।
- फोटो : संवाद
सिर्फ गाड़ियां नहीं, कई कारण हैं प्रदूषण के पीछे
बीजेपी सरकार ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि 2018 में पुराने वाहनों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के आदेश पर फिर से विचार करने की जरूरत है। सरकार का कहना है कि वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ गाड़ियां जिम्मेदार नहीं हैं। इसके कई और स्रोत भी हैं जैसे पराली जलाना, लकड़ी या कचरा जलाना, सड़क और निर्माण से उड़ने वाली धूल, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, मौसम और अन्य मौसमी कारक। साथ ही, प्रदूषण का स्तर मौसम के हिसाब से भी बदलता रहता है।
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PUC नियम सख्ती से लागू
दिल्ली सरकार ने बताया कि उसके परिवहन विभाग ने प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नियमों को काफी सख्ती से लागू किया है। इसी का नतीजा है कि इस साल के पहले सात महीनों में 1,63,103 चालान काटे गए हैं। ये संख्या 2021 में सिर्फ 29,589 थी, 2022 में 43,494, 2023 में 36,176 और 2024 में 68,077 थी। इससे पता चलता है कि सरकार अब नियमों के पालन में ज्यादा सख्ती बरत रही है।
सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों से गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण घटा
दिल्ली सरकार ने यह भी कहा कि शहर में सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने और सड़कों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने से भी वाहन प्रदूषण में कमी आई है। इससे सफर भी सुगम हुआ है और पर्यावरण पर भी अच्छा असर पड़ा है।
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वायु गुणवत्ता में दिखा सुधार, अच्छे AQI वाले दिन बढ़े
सरकार के मुताबिक, दिल्ली में अच्छे AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) वाले दिनों की संख्या भी बढ़ी है। 2018 में ऐसे 159 दिन थे जबकि 2024 में यह बढ़कर 209 दिन हो गए हैं। सिर्फ इस साल जुलाई तक ही 106 दिन ऐसे रहे जब वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही। दिल्ली सरकार का दावा है कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) को प्रभावी तरीके से लागू करने से भी प्रदूषण पर काबू पाने में मदद मिली है।
इस तरह, दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों को गिनवा रहे हैं। ताकि सुप्रीम कोर्ट पुराने वाहनों पर लगे बैन पर फिर से विचार करे।
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