पहले से जताई थी चिंता, अब दिखा असली असर
राजीव बजाज देश के उन गिने-चुने लोगों में शामिल हैं जिन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर रेयर अर्थ मटेरियल्स की कमी जारी रही, तो यह भारत की ईवी इंडस्ट्री को ठप कर सकती है। अब वही खतरा हकीकत बनता नजर आ रहा है। बजाज ऑटो पहली ऐसी कंपनी बन गई है जिसने ईवी प्रोडक्शन को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 में बजाज की ईवी प्रोडक्शन पूरी क्षमता पर चल रही थी। क्योंकि उस वक्त उनके पास रेयर अर्थ मटेरियल्स का स्टॉक मौजूद था। लेकिन जुलाई में प्रोडक्शन आधा हो गया, और अब अगस्त में पूरी तरह बंद होने की आशंका है। बजाज ने सरकार से अपील की है कि वो सप्लाई चेन की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर सभी स्टेकहोल्डर्स को स्पष्ट जानकारी दे।
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Bajaj Chetak Electric Scooter
- फोटो : Bajaj Auto
चीन से सप्लाई पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
हालांकि कुछ महीने पहले चीन ने चुनिंदा देशों के लिए अपने निर्यात नियमों में थोड़ी ढील दी थी। लेकिन भारत उस सूची में नहीं था, जबकि भारत इस वक्त दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता ऑटोमोबाइल मार्केट है। जैसे-जैसे दुनिया क्लीन मोबिलिटी की ओर बढ़ रही है, ईवी की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया है। मगर रेयर अर्थ मटेरियल्स के मामले में चीन अब भी पूरी दुनिया पर हावी है।
इन मटेरियल्स का इस्तेमाल सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में नहीं, बल्कि मैग्नेट, बैटरियों और दूसरे हाईटेक कंपोनेंट्स में होता है। इसके अलावा ये पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों, रिन्यूएबल एनर्जी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस सिस्टम और एयरोस्पेस इंडस्ट्री में भी जरूरी हैं।
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भारत की ईवी यात्रा को बड़ा झटका
चीन द्वारा रेयर अर्थ मटेरियल्स के निर्यात पर सख्ती से भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में की जा रही कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। सबसे पहले असर ईवी सेक्टर पर पड़ा है और अब आशंका है कि बाकी सेक्टर भी जल्द ही इससे प्रभावित होंगे।
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Bajaj Chetak 3001 Electric Scooter
- फोटो : Chetak
नीतियों और घरेलू निर्माण पर टिकी हैं उम्मीदें
अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या नीतिगत कदम उठाती है। एक्सपर्ट्स पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि जब तक भारत में मैग्नेट्स और अन्य कंपोनेंट्स का घरेलू निर्माण नहीं होता, तब तक ईवी सेक्टर को झटके लगते रहेंगे।
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