आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर कार के टायर में हवा की मात्रा अधिक होगी तो टायर का साइज बढ़ जाएगा। कार की ज्यादा गति होने पर कार के टायर सड़क से कम जुड़ेंगे। इस वजह से टायर का घर्षण कम हो जाता है और टायर का घिसाव बढ़ जाता है। ऐसे में टायर का तापमान काफी ऊपर चला जाता है और टायर गर्म हो जाते हैं। अगर कार को लंबे समय तक इसी स्थिति में चलाया जाए तो टायर किसी भी वक्त फट सकते हैं। ऐसी स्थिति में कार में बैठे लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।
कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि छोटी कार में 35पीएसआई से कम हवा का प्रेशर होना चाहिए। ऐसा करने से टायरों की क्षमता बेहतर रहती है और टायर लंबे समय तक चलते हैं। साथ ही टायरों को कम से कम नुकसान होता है। वहीं, साधारण कार के लिए 30 से 40 पीएसआई तक टायर में एयर प्रेशर रख सकते हैं।
कार के टायरों में अगर सही मात्रा में एयर प्रेशर होगा तो कार बेहतर क्षमता के साथ सड़क पर चलेगी। कार का संतुलन बढ़िया रहेगा और टायरों की अच्छी कंडीशन से गाड़ी की माइलेज में भी इजाफा होता है।