गंभीर देखभाल के विशेषज्ञ डॉक्टर मिर्जा आलमदार अली ने सोशल मीडिया X पर साझा किया कि वह मदुरै दुर्घटना पीड़ितों का इलाज करने वाले डॉक्टरों में से एक थे। उन्होंने कहा कि मरीज ओडिशा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, जो बंगलूरू में काम कर रहे थे। इस हादसे में आठ साल की दो लड़कियों की भी जान चली गई थी।
डॉ. अली ने X पर लिखा, "रविवार काम के लिहाज से एक कठिन दिन था। पांच युवा वयस्कों, जिनकी उम्र 22-24 साल थी, से जुड़ी एक दुर्घटना हमाने सामने आई। ये सभी ओडिशा के आईटी इंजीनियर थे और बंगलुरू में काम कर रहे थे। एक शांत रविवार की रात इन युवाओं की जान बचाने के लिए हमें समय से जंग लड़नी पड़ी। इन सभी को गंभीर दिमागी चोटें और ईएनटी रक्तस्राव के साथ गंभीर चेहरे का फ्रैक्चर हुआ था। सबसे कठिन हिस्सा यह तय करना था कि इलाज को किसको प्राथमिकता दी जाए। और न्यूरोसर्जन को तत्काल हस्तक्षेप के लिए सूचित किया जाए।"
ट्वीट के समय, दुर्घटना में शामिल दो लोगों की चोटों के कारण मृत्यु हो गई थी, तीन आईसीयू में थे। डॉ. अली ने कहा, "मामूली चोटों के साथ जीवित रहने वाला एकमात्र व्यक्ति वही था जिसने सीटबेल्ट पहनी हुई थी।"
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बचे हुए व्यक्ति की पहचान के. मणिकंदन के रूप में हुई है, जो मृत जुड़वां बच्चों के पिता हैं और वह गाड़ी चला रहे थे।
डॉक्टर ने आगे कहा, "आज, उनके माता-पिता छोटे शहरों से यात्रा कर अपने बच्चों के शव को लेने के लिए आए। यह घटना सुरक्षित रूप से गाड़ी चलाने, सीटबेल्ट पहनने और कभी भी शराब पीकर गाड़ी न चलाने की याद दिलाती है।"
रिपोर्टों के मुताबिक, तेज रफ्तार वाहन से कंट्रोल खोने के बाद दुर्घटना हुई थी। सीसीटीवी फुटेज में दिखाया गया है कि वह पहले एक स्कूटर से टकराता है और फिर डिवाइडर से टकराकर बुरी तरह से पलट जाता है। यह दुर्घटना बुधवार तड़के सिवारकोट्टई के पास विरुधुनगर-मदुरै हाईवे पर हुई थी।
वीडियो में यह भी दिखाया गया कि कैसे दो पैदल चलने वाले बाल-बाल बचे। इस बीच, कालीगुडी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच कर रही है।