Road Accident Compensation : आमतौर पर किसी हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए सरकार मुआवजे का एलान करती है। मुआवजे की राशि घटना की गंभीरता और वक्त की नजाकत के देखते हुए तय की जाती है। महाराष्ट्र में 2016 के एक सड़क दुर्घटना के मामले में मुआवजे की राशि 87 लाख रुपये तय की गई है। महाराष्ट्र के ठाणे में इस हादसे में 36 वर्षीय कारोबारी की मौत हो गई थी। अब इस मामले में फैसला सुनाते हुए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने व्यवसायी के परिजनों को 87 लाख रुपये से ज्यादा का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
न्यायाधिकरण ने 14 सितंबर को आदेश जारी किया था, जिसकी प्रति गुरुवार को उपलब्ध कराई गई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश और एमएसीटी सदस्य एमएम वलीमोहम्मद ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक के मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से मृतक व्यक्ति के परिवार को मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने दावा दायर करने की तारीख से प्रति वर्ष 7 फीसदी के हिसाब से ब्याज के भुगतान का भी आदेश दिया है।
मुआवजे पर ब्याज की राशि बढ़ जाएगी अगर...
आदेश में कहा गया है कि यदि प्रतिवादी पक्ष दो महीने के अंदर मुआवजे का भुगतान करने में नाकाम रहता है, तो ब्याज राशि को बढ़ाकर 8 फीसदी प्रति वर्ष कर दिया जाएगा। दावेदार राजस्थान के चुरू के रहने वाले हैं, जिनमें मृतक जीवराज सिंह की पत्नी, तीन बच्चे और माता-पिता शामिल हैं।
सुनवाई में ट्रक मालिक पेश नहीं हुआ
इस मामले की सुनवाई के दौरान ट्रक मालिक ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ और उसके खिलाफ एकतरफा मामला तय किया गया। हालांकि बीमा कंपनी का प्रतिनिधि सुनवाई में पेश हुआ और उसने विभिन्न आधारों पर दावे का विरोध किया।
कहां की घटना?
दावेदारों की ओर से पेश अधिवक्ता वी के सिंह ने न्यायाधिकरण को सूचित किया कि पीड़ित कपड़ा पैकेजिंग व्यवसाय से जुड़े होने के साथ साथ ब्रोकर भी था और उसकी सालाना आय करीब 6.17 लाख रुपये थी। सिंह ने कहा कि 4 फरवरी 2016 को वह व्यक्ति रजनोली गांव में मोटरसाइकिल पर जा रहा था, तभी एक ट्रक ने उसके दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी जिससे उसकी मौत हो गई। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि कोंगों पुलिस स्टेशन में ट्रक चालक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से चालक की लापरवाही साबित होती है।
आदेश में क्या कहा गया
एमएसीटी ने आदेश दिया कि पीड़ित के परिजनों को 87.29 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, जिसमें कंसोर्टियम के नुकसान के लिए 40,000 रुपये और संपत्ति के नुकसान और अंतिम संस्कार के खर्च के रूप में 15,000 रुपये की राशि शामिल है।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मुआवजे की राशि मिलने के बाद मृतक के हर बच्चे के नाम से छह-छह लाख रुपये सावधि योजना में जमा कराए जाएंगे और नौ-नौ लाख रुपये मृतक के माता पिता को दिए जाएं। जबकि बाकी पांच लाख रुपये तीन साल की अवधि के लिए मृतक की विधवा के खाते में सावधि के लिए रखे जाएं।