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Willys की यह Jeep सेना के कैंप की बढ़ा रही है शोभा, 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान से छीनी थी

Fri, 14 Aug 2020 05:19 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मूल रूप से अमेरिका की यह जीप अब एक बेशकीमती कब्जे के रूप में पूरे भारत में रेजिमेंट के साथ यात्रा करती है। रेजीमेंट इस जीप को विजेता ट्रॉफी मानते हुए इसकी चमक को बरकरार रखा है और लगभग 50 वर्षों से वाहन की उचित मेंटेनेंस को सुनिश्चित किया है।
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Willys Jeep 'Jarpal Queen' captured from Pakistan in 1971 war - फोटो : PTI
49 वर्षों और शायद इससे भी ज्यादा समय से, पाकिस्तान के खिलाफ भारत की विजय का प्रतीक है Jarpal Queen (जरपाल क्वीन)। भारतीय सेना की 'युद्ध ट्रॉफी' के रूप में यह भारत के हर हिस्से में यात्रा करती रही है। 

क्वीन दरअसल चार पहियों पर चलने वाली एक शाही शान वाली Willys Jeep (विलीज जीप) है जिसका नाम पाकिस्तान में स्थित जरपाल के नाम पर रखा गया है। यह अभी भी चमकदार और शानदार स्थिति में है, जो कि लेह से लगभग 40 किमी दूर, 3 ग्रेनेडियर रेजिमेंट के शिविर में भव्य रूप से खड़ी है और उसकी शान बढ़ा रही है।
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Willys Jeep 'Jarpal Queen' captured from Pakistan in 1971 war - फोटो : Amar Ujala
यह वाहन, जिसके साइड में उर्दू लिपि लिखी हुई है, 1971 के संघर्ष के दौरान पाकिस्तान से पकड़ी गई "युद्ध ट्राफी" है।

किसी समय इस जीप पर रिकॉयलेस गन फिट थी। मूल रूप से अमेरिका की यह जीप अब एक बेशकीमती कब्जे के रूप में पूरे भारत में रेजिमेंट के साथ यात्रा करती है। रेजीमेंट इस जीप को विजेता ट्रॉफी मानते हुए इसकी चमक को बरकरार रखा है और लगभग 50 वर्षों से वाहन की उचित मेंटेनेंस को सुनिश्चित किया है। 
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Willys Jeep - फोटो : Jeep (For Reference Only)
1982 में थ्री ग्रेनेडियर रेजीमेंट में शामिल रहे और सेना मेडल से सम्मानित कर्नल (सेवानिवृत्त) जेएस ढिल्लों बताते हैं, "हमने इसे जरपाल युद्ध के दौरान कब्जे में लिया था। पाकिस्तानी सेना ने 1971 के युद्ध में जरपाल क्षेत्र में शकरगढ़ सीमा पर भारत पर हमले के लिए इसे तैनात किया था। भारतीय सेना ने जीत हासिल करने के साथ ही यादगार के रूप में इस जीप पर कब्जा कर लिया और इसका नाम ‘जरपाल क्वीन’ रखा गया। इस युद्ध में भारत को दो परम वीर चक्र हासिल हुए थे।" 

परमवीर चक्र प्राप्त करने वालों में ग्रेनेडियर रेजिमेंट से कर्नल होशियार सिंह और आर्म्ड रेजिमेंट से सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल शामिल थे।  

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Willys Jeep - फोटो : Jeep (For Reference Only)
फिरोजपुर में हुआ था पंजीकरण
कर्नल ढिल्लो बताते हैं कि 1988 में जब रेजीमेंट पंजाब के फिरोजपुर में थी तो सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए जीप को पंजाब परिवहन विभाग के साथ पंजीकृत किया गया था। उन्होंने एक नंबर लिया, बीमा किया और इसे पंजीकृत कराया। वे कहते हैं कि यह यह जीप नहीं वॉर ट्रॉफी है इसे विशिष्ट मेहमानों को दिखाया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों को गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान इसका इस्तेमाल भी किया जाता है। 
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Willys Jeep - फोटो : Jeep (For Reference Only)
जहां रेजीमेंट गई वहां गई जीप
उन्होंने कहा हैं कि रेजिमेंट जहां भी तैनात की गई है, यह जीप वहां ले जाई गई। इनमें जयपुर, कुपवाड़ा, शिमला, पूंछ, मेरठ, फिरोजपुर... जैसे शहरों की लंबी सूची है। जहां तक मैं याद कर सकता हूं रेजिमेंट के इथोपिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन को छोड़कर जीप रेजीमेंट के साथ हर जगह गई। 
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Willys Jeep - फोटो : Jeep (For Reference Only)
यह जीप पड़ोसी देश के साथ कई झड़पों की भी गवाह रही है, खासकर जब रेजिमेंट जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। 

1971 में पूर्वी पाकिस्तान को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ गया। यह 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ और बांग्लादेश के निर्माण का कारण बना। 
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