फिलहाल महाराष्ट्र और दिल्ली दो ऐसे राज्य हैं, जहां चिप के साथ स्मार्ट कार्ड जारी किये जाते हैं। वहीं दूसरे राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश में बिना चिप वाले लैमिनेटेड कार्ड वाले लाइसेंस जारी किये जाते हैं। मंत्रालय देश के सभी राज्यों के लिए कॉमन स्टैंडर्ड फॉर्मेट और डिजाइन जारी कर चुका है। वहीं नए फॉर्मेट में जानकारियों और फॉन्ट की सही जगह का प्रस्ताव दिया गया है।
मंत्रालय पहले ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए सारथी एप्लीकेशन डेवलप कर चुका है, जिसमें पूरे देश के सभी लाइसेंसधारकों का डाटाबेस एकत्र है। तकरीबन 15 करोड़ लाइसेंस धारकों के रिकॉर्ड इसमें शामिल हैं। वहीं सारथी एप्लीकेशन में यह भी फीचर है कि रियल-टाइम ऑनलाइन बेसिस पर फर्जी लाइसेंस के साथ चालान से संबंधित जानकारियों को पकड़ सकता है।
गौरतलब है कि मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि तकरीबन 30 प्रतिशत भारतीयों के लाइसेंस फर्जी हैं। इसके अलावा पुलिस रिपोर्ट्स के मुताबिक अकेले दिल्ली एनसीआर में 01 जनवरी 2019 के शुरुआती 15 दिनों में ही अव्यस्कों द्वारा ड्राइविंग के मामलों में 589 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जिनमें 61 में जुवेनाइल के मामले से जुड़े थे और उन्हें चालान जारी किये गए।
वहीं सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि कम उम्र में नाबालिगों द्वारा ड्राइविंग करने के मामलों की संख्या बढ़ रही है। 2013 में यह आंकड़ा 15 से 16 साल का था, जबकि अब यह आंकड़ा 13 से 14 साल का हो गया है। वहीं चिंताजनक बात यह है कि निसान ने एक एनजीओ सेवलाइफ फाउंडेशन के साथ रोड सेफ्टी पर सर्वे किया था, जिसमें यह सामने आया था कि 96.4 प्रतिशत मां-बाप को पता होता है कि उनके बच्चे ड्राइविंग कर रहे हैं।
वहीं नए संशोधित मोटर व्हीकल बिल में यह प्रस्ताव रखा गया है कि नाबालिग के ड्राइविंग करते हुए पकड़े जाने पर उनके पैरेंट्स पर भी कानूनी कार्रवाई की जाये। जिसके तहत नाबालिग के वाहन चलाने पर पैरेंट्स की गाड़ी का न केवल रजिस्ट्रेशन रद्द होगा, बल्कि दोषी साबित होने पर 25 हजार रुपये जुर्माना और तीन साल की सजा भी होगी।