26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कैंपों को निशाना बनाया था। इस मिशन का हिस्सा रहे भारतीय वायुसेना के दो पायलटों ने एक अंग्रेजी अखबार के साथ बातचीत में बताया कि इस ऑपरेशन को 90 सेकेंड में अंजाम दिया गया था। मिशन की गोपनीयता इस स्तर की थी कि ऑपरेशन में शामिल पायलटों के परिजन भी इससे अनभिज्ञ थे।
उल्लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना ने 48 वर्षों में पहली बार पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में जैश के ठिकानों को तबाह कर दिया था। यह कार्रवाई पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के बाद की गई थी। 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले को जैश के आत्मघाती हमलावर ने निशाना बनाया था, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे।
भारतीय एयर स्ट्राइक में वायुसेना के मिराज 2000 विमानों का उपयोग किया गया था। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अभियान का हिस्सा रहे एक पायलट ने बताया कि 90 सेकेंड के भीतर उन्होंने अपने लक्ष्य पर निशाना साधा और मिसाइल दागकर वहां से वापस आ गए। उनके इस ऑपरेशन के बारे में वायुसेना के भी चुनिंदा लोगों को ही जानकारी थी। उन्होंने बताया कि अगले दिन जब उनकी पत्नी ने इस हमले की खबर टेलीविजन पर देखी तो उनसे पूछा, "क्या तुम भी इस मिशन का हिस्सा थे? इस पर पायलट ने चुप्पी साधी और वापस सो गए।
मिशन का हिस्सा रहे दूसरे पायलट ने कहा, 'हमने बहुत सारे कॉम्बैट एयर पेट्रोल के साथ नियंत्रण रेखा (एलओसी) से उड़ान भरी। एलओसी पर बहुत सारे कॉम्बैट एयर पेट्रोल को उड़ाने का मकसद पाकिस्तान की हवाई सुरक्षा को चकमा देना था।' स्ट्राइक से दो दिन पहले पायलटों को कुछ होने का आभास हुआ था। उन्होंने कहा, 'हमें पता था कि कुछ होने वाला है लेकिन किसी को भी इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं थी। सामरिक उड़ान की संख्या बढ़ गई थी। हम में से कई लोग अलग-अलग विमान उड़ा रहे थे।'
उन्होंने कहा, 'जहां पहले कॉम्बैट एयर पेट्रोल बिना हथियारों के थे। वहीं 25 फरवरी की शाम चार बजे मिराज 2000 को स्पाइस-2000 मिलाइल गाइडेड बम से लोड किया गया। मिसाइल में टारगेट का कोड फीड किया गया। हमने उस रात दो बजे उड़ान भरी थी।' 26 फरवरी के मिशन को वायुसेना ने मिराज 2000 और 2000i से अंजाम दिया था।
पाकिस्तान को चकमा देने के लिए सुखोई 30एमकेआई ( Sukhoi 30MKi ) को तैनात किया गया था। साथ ही फाल्कन अवाक्स की तैनाती की गई थी ताकि पाकिस्तानी हवाई रक्षा प्रणाली भारतीय विमानों का पता न लगा सके। यदि मिशन में ज्यादा समय लगता तो इसके लिए एंब्रायर एईडब्ल्यूएस मिड एयर-रिफ्यूलर को हवा में तेल भरने के लिए तैनात किया गया था। हमले के बाद की तस्वीरें लेने के लिए हेरोन ड्रोन की तैनाती की गई थी।