सूर्य ग्रहण के उपाय (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कुंडली में ऐसे बनता है सूर्य ग्रहण योग-
राहु-केतु सूर्य से बैरभाव रखते हैं ऐसे में जिस स्थान पर भी राहु और सूर्य एक साथ होते हैं, वहां पर सूर्य को ग्रहण लगता है। ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के किसी भाव में सूर्य के साथ राहु भी हो तब सूर्य ग्रहण दोष लगता है। इसके अलावा यदि सूर्य किसी भी भाव में स्थित हो और सूर्य पर राहु की छाया पड़ रही हो तो भी जातक की कुंडली में सूर्य ग्रहण योग बनता है। ज्योतिष के अनुसार जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रहण लगा हो उसकी कुंडली में पितृदोष भी लगता है। किसी जातक की कुंडली में शुक्र, बुध या राहु एकसाथ, दूसरे, पांचवें, नौवें अथवा बारहवें भाव में स्थित हो तो पितृ दोष लगता है।
सूर्य ग्रहण के उपाय (प्रतीकात्मक तस्वीर)
लाल किताब के अनुसार कुंडली में सूर्य ग्रहण निवारण के उपाय
- यदि किसी की कुंडली में सूर्य ग्रहण या पितृदोष का प्रभाव हो तो ऐसे में जातक को गेहूं, गुड़ व तांबे का दान करना चाहिए लेकिन गुड़ का सेवन नहीं करना चाहिए।
- यदि कुंडली में सूर्य ग्रहण योग या पितृ दोष हो तो किसी से भी कोई वस्तु बिना पैसों के नहीं लेनी चाहिए और नेत्रहीनों की सहायता करनी चाहिए।
- यदि ग्रहण दोष यो पितृ दोष हो तो उसके अशुभ प्रभावो से बचने के लिए छह नारियल लेकर सिर के ऊपर से वारकर बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए।
- ग्रहण दोष की अशुभता से बचने के लिए पीपल का वृक्ष लगाना चाहिए और उसमें प्रतिदिन जल देना चाहिए।
- ग्रहण दोष के प्रभावों से मुक्ति के लिए अपने परिवार के सभी सदस्यों से बराबर-बराबर रुपए के सिक्के लेकर किसी मंदिर में दान कर दें।
- इन उपायों में से एक समय में एक ही उपाय करें।
सूर्य ग्रहण के उपाय (प्रतीकात्मक तस्वीर)
ज्योतिष के अनुसार करें ये उपाय
- यदि कोई जातक कुंडली के सूर्य ग्रहण के अशुभ प्रभाव से पीड़ित हैं तो नियमित रूप से प्रातः उठकर आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
- प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नानादि करके निवृत्त हो जाएं और उगते हुआ सूर्य को तांबे के लोटे से जल दें।