Somvati Amavasya 2022: इस अमावस्या के दिन व्रत पूजन और पितरों को जल तिल देने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
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सोमवती अमावस्या का महत्व
सोमवार के दिन आने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से बड़ा ही महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस अमावस्या के दिन व्रत पूजन और पितरों को जल तिल देने से बहुत ही पुण्य की प्राप्ति होती है। सोमवार का दिन भगवान शिव का दिन माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन व्रत करने और शिव पार्वती की पूजा करने से सुहाग की आयु लंबी होती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दांपत्य जीवन में स्नेह और सद्भाव बढ़ाने के लिए भी सुहागिनों को सोमवती अमावस्या का व्रत करना चाहिए। इस दिन की गई पूजा से नकारात्मक विचार दूर होते हैं। भगवान शिव के उपासकों द्वारा बड़े स्तर पर यज्ञों का आयोजन किया जाता है।
Somvati Amavasya 2022: इस बार अमावस्या की तिथि दो दिन पड़ रही है, ऐसे में इसे दो दिन मनाया जाएगा।
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सोमवती अमावस्या की तिथि
अमावस्या आरंभ: 31 जनवरी, सोमवार, दोपहर 2: 20 मिनट से
अमावस्या समाप्त: 1 फरवरी, मंगलवार, प्रातः11:16 मिनट तक
Somvati Amavasya 2022: पितृ तर्पण के लिए सोमवती अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है, इसलिए दोपहर के समय पितरों की शांति के लिए पूजा करें।
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सोमवती अमावस्या के दिन क्या करें
- यदि संभव हो तो सोमवती अमावस्या के दिन गंगा स्नान करें। यदि ऐसा संभव न हो पाए तो घर में ही स्नान करते समय गंगाजल मिला लें।
- सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष का पूजन करें। मान्यता है कि पीपल में 33 कोटि देवी-देवता निवास करते हैं। ऐसे में सौभाग्य प्राप्ति के लिए पीपल देवता का पूजन करें।
- पीपल के वृक्ष के पूजन के बाद पीले रंग के पवित्र धागे को 108 बार परिक्रमा करके बांधें।
- सोमवती अमावस्या के दिन शनि मंत्र का पाठ करें, लाभ मिलेगा।
- जरूरतमंदों और गरीबों को भोजन कराएं और उनको वस्त्र और धन का दान दें।
- पितृ तर्पण के लिए सोमवती अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है, इसलिए दोपहर के समय पितरों की शांति के लिए पूजा करें।