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कुंडली में इस ग्रह के अशुभ होने से आती हैं तमाम परेशानियां, जीवन बन जाता है नरक, जानें उपाय

Thu, 24 Dec 2020 07:56 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सौरमंडल के ग्रह - फोटो : Pixabay
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ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को छाया ग्रह कहते हैं। राहु-केतु दोनों ग्रह वक्री चाल चलते हैं। इनका प्रभाव हमेशा अशुभ नहीं होता है। किंतु यदि दोनों की स्थिति अशुभ होने पर जातक को घातक परिणाम भुगतने पड़ते हैं। जो भी व्यक्ति राहु के अशुभ प्रभाव में आता है उसे तमाम तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। ज्योतिष में राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए सरल उपाय भी बताए गए हैं।

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कुंडली में राहु - फोटो : kundli me rahu
कुंडली में राहु की शुभ स्थिति होने पर जातक राजनेता की सहायता से मान-सम्मान और उच्च पद पर आसीन होता है। कुंडली में राहु के शुभ जगह पर होने से व्यक्ति सभी तरह के भौतिक सुखों का आनंद लेता है।
 
कुंडली में राहु का बुरा प्रभाव पड़ने से व्यक्ति के अंदर बुरी आदतें आने लगती है। धर्म के रास्ते को छोड़कर गलत रास्ते पर चलने को विवश हो जाता है। साथ ही मांस-मदिरा का सेवन ज्यादा करने लगता है।
बुध, शुक्र और शनि राहु के मित्र होते हैं जबकि सूर्य और चंद्रमा राहु के शत्रु। मंगल और गुरु का राहु से सम संबंध माना जाता है।

ज्योतिष में राहु - फोटो : अमर उजाला
चतुर्थ, अष्टम और द्वादश भाव में स्थित राहु अशुभ होता है। 
कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, मंगल लग्न भाव के स्वामी हैं तो राहु से अशुभ फल प्राप्त होते हैं। राहु इन ग्रहों के शत्रु माने गए है।
कुंडली में अगर शनि, शुक्र और बुध लग्न भाव के स्वामी हैं तो राहु शुभ फल प्रदान करता है। राहु इन ग्रहों का मित्र है। पेट संबंधी रोग जैसे गैस की परेशानी, बाल झड़ने लगना, लगातार सिरदर्द का बना रहना आदि। यहां तक कोई बड़ी बीमारी हो सकती है। भैरव मंदिर में रविवार को तेल का दीपक जलाएं। बजरंग बाण या हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करें। साथ ही हर सोमवार शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। शनिवार के दिन काला कंबल का दान करें। 
कुत्ते को रोटी, चिड़िया को दाना और ब्राह्मण को भोजन खिलाएं। लोहे का दान करने से निश्चित रूप से राहु के कष्ट दूर होंगे। 
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राहु देव - फोटो : अमर उजाला
राहु एक राशि से दूसरी राशि में करीब 18 महीने के बाद अपनी राशि बदलते हैं। राहूकाल की महादशा लगभग 18 साल की होती है। वहीं राहू की अंतर्दशा 2 साल और 8 महीने की होती है।
कुंडली में राहु के प्रभाव को कम करने के लिए राहु के बीज मंत्र ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम: का 108 बार जप करना चाहिए।
गोमेद को राहु का रत्न माना गया है और राहू की दिशा दक्षिण-पश्चिम मानी गई है।
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