जब- जब ग्रहण लगता है तब-तब इसका खगोलीय और धार्मिक महत्व विशेष रूप से माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण की घटना को काफी खास माना जाता है। नया साल शुरू हो गया है और वैदिक पंचांग की गणना के मुताबिक वर्ष 2024 में कुल 5 ग्रहण लगेंगे जिसमें सो 3 चंद्र ग्रहण होंगे जबकि 2 सूर्य ग्रहण होंगे। साल का पहला ग्रहण 25 मार्च को लगेगा जो चंद्र ग्रहण होगा। 25 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने पर चंद्रमा कन्या राशि में मौजूद होंगे जहां पर पहले से राहु विराजमान होंगे। इस बार चंद्र ग्रहण के दौरान होली का त्योहार मनाया जाएगा। आइए जानते हैं साल के पहले ग्रहण की खास बातें...
चंद्र ग्रहण के साए में होली 2024
पंचांग की गणना के मुताबिक साल 2024 में होली का त्योहार 25 मार्च को मनाया जाएगा और इसी दिन चंद्र ग्रहण भी लगेगा। वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 24 मार्च को रात 09 बजकर 57 मिनट से आरंभ हो जाएगी जिसका समापन 25 मार्च को रात्रि के 12 बजकर 32 मिनट पर होगा। इस तरह से 25 मार्च को चंद्र ग्रहण के साए में होली का त्योहार मनाया जाएगा।
साल 2024 का पहला चंद्र ग्रहण
हिंदी पंचांग के मुताबिक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि यानी 25 मार्च 2024, सोमवार को चंद्र ग्रहण लगेगा। यह चंद्र ग्रहण कन्या राशि में लगेगा। साल का पहला चंद्रग्रहण सुबह 10 बजकर 23 मिनट से शुरू हो जाएगा जो दोपहर 03 बजकर 02 मिनट तक रहेगा। हालांकि इस चंद्र ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा जिस कारण से इसका सूतककाल मान्य नहीं होगा। यह चंद्र ग्रहण अमेरिका, जापान, रूस के कुछ हिस्से, आयरलैंड, इंग्लैंड, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, जर्मनी, फ्रांस, हॉलैंड, बेल्जियम, दक्षिणी नॉर्वे और स्विट्जरलैंड में दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण का राशियों पर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 25 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशि के जातकों पर पड़ेगा लेकिन कुछ राशि के जातकों पर इस चंद्रग्रहण का विशेष असर देखने को मिल सकता है। इस चंद्र ग्रहण के कारण कुछ राशि की किस्मत चमक सकती है और अच्छा धन लाभ हो सकता है। मिथुन, सिंह, मकर और धनु राशि के जातकों पर इस चंद्र ग्रहण का शुभ प्रभाव रहेगा।
अप्रैल में पहला सूर्य ग्रहण
वहीं साल के पहले चंद्र ग्रहण के बाद अप्रैल में चैत्र अमावस्या को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। यह पश्चिमी एशिया, दक्षिणी-पश्चिम यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अटलांटिक महासागर, उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव में देखा जा सकेगा। भारत में इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा।