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Parshuram Jayanti 2021: भगवान परशुराम की वह प्रतिज्ञा, जिसके कारण धरती से 21 बार हुआ क्षत्रियों का संहार

Wed, 12 May 2021 05:59 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Parshuram Jayanti 2021
Parshuram Jayanti 2021: परशुराम जयंती 14 मई शुक्रवार को मनाई जाएगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल वैशाख माह शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती बड़ी धूम-धाम के साथ मनायी जाती है। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम जगत के पालनहार विष्णुजी के अवतार हैं। इस दिन विधि-विधान से भगवान परशुराम जी की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान परशुराम ने 21 बार पृथ्वी से क्षत्रियों का संहार कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की थी। आइए जानते हैं उन्होंने ऐसा क्यों किया? इसके पीछे का कारण क्या था?
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परशुराम जयंती 2021 - फोटो : wikipedia
ब्राह्मण कुल में हुआ जन्म
भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। उनका जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था। उनके जन्म के समय आकाश मंडल में छह ग्रहों का उच्च योग बना हुआ था। तब उनके पिता और सप्त ऋषि में सम्मिलित ऋषि जमदग्नि को पता चल गया था कि उनका बालक बेहद पराक्रमी होगा। 
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परशुराम जयंती 2021 - फोटो : सोशल मीडिया।
राजा सहस्त्रार्जुन का अत्याचार
हैहय वंश के राजा सहस्त्रार्जुन ने अपने बल और घमंड के कारण लगातार ब्राह्राणों और ऋषियों पर अत्याचार कर रहा था। सहस्त्रार्जुन अपनी सेना सहित भगवान परशुराम के पिता जमदग्रि मुनि के आश्रम में पहुंचा। जमदग्रि मुनि ने सेना का स्वागत और खान पान की व्यवस्था अपने आश्रम में की। 

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परशुराम जयंती 2021 - फोटो : Social media
परशुराम ने किया सहस्त्रार्जुन का वध
मुनि ने आश्रम की चमत्कारी कामधेनु गाय के दूध से समस्त सैनिकों की भूख शांत की। कामधेनु गाय के चमत्कार से प्रभावित होकर उसके मन में लालच पैदा हो गया। इसके बाद जमदग्रि मुनि से कामधेनु गाय को उसने बलपूर्वक छीन लिया। जब यह बात परशुराम को पता चली तो उन्होंने सहस्त्रार्जुन का वध कर दिया। 
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परशुराम जयंती 2021 - फोटो : Social media
21 बार किया था धरती से क्षत्रिय वंश का विनाश
सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने बदला लेने के लिए परशुराम के पिता का वध कर दिया और पिता के वियोग में भगवान परशुराम की माता चिता पर सती हो गयीं। पिता के शरीर पर 21 घाव को देखकर परशुराम ने प्रतिज्ञा ली कि वह इस धरती से समस्त क्षत्रिय वंशों का संहार कर देंगे। इसके बाद पूरे 21 बार उन्होंने पृथ्वी से क्षत्रियों का संहार कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की।
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परशुराम जयंती 2021 - फोटो : Social media
परशुराम और गणपति महाराज के बीच हुआ युद्ध
भगवान परशुराम को क्रोध भी अधिक आता था। उनते क्रोध से स्वयं गणपति महाराज भी नहीं बच पाए थे। एकबार जब परशुराम भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पहुंचे, तो गणेश जी ने उन्हें उनसे मिलने नहीं दिया। इस बात से क्रोधित होकर उन्होंने अपने शस्त्र से भगवान गणेश जी का एक दांत तोड़ डाला। इस कारण से भगवान गणेशजी एकदंत कहलाने लगे।
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