पिछले 17 बरस रामदेव के नाम हैं। इन वर्षों में उन्होंने योग को एक बार फिर से अंतर्राष्ट्रीय विषय बना दिया।
योग की धरती हरिद्वार और ऋषिकेश पुराने जमाने से रहे हैं। अब एक बार फिर यह श्रेय हरिद्वार को मिला है कि यहां के बाबा रामदेव की बदौलत योग को अंतर्राष्ट्रीय दिवस का दर्जा मिला।
बाबा रामदेव हरिद्वार में वर्ष 1995 में आकर संन्यासी बने थे। उन्होंने कृपालु बाग आश्रम में गुरु शंकर देव से संन्यास की दीक्षा ली थी। उनकी योग साधना हिमालय में चलती रही। हरिद्वार आकर उन्होंने कनखल की तपोभूमि को अपनी रचना भूमि बनाया।
वर्ष 2000 तक बाबा इतने लोकप्रिय हो गए कि आस पास के क्षेत्रों में उनका नाम हो गया। 2001 में बाबा ने आश्रम से बाहर निकलकर योग की पताका पूरे विश्व में फहराने का निर्णय लिया। उस दिन से आज तक बाबा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उन्हीं के कारण योग नए सिरे से प्रतिष्ठित हुआ है। यहां तक की दुनिया के 193 देशों में इस समय योग किया जा रहा है। बाबा रामदेव ने अपने साथी आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर योग और आयुर्वेद का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया।