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BJP-AAP दोनों बोलीं 'पहले आप', दिल्ली का पेंच फंसा
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 09 Dec 2013 01:38 PM IST
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विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की धमाकेदार एंट्री ने दिल्ली का पेंच फंसा दिया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से उलट राजधानी में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और दो दल संख्या बल के मामले में बेहद करीब खड़े हैं।
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इस अजीबोगीब स्थिति से निकलने की राह नहीं दिख रही। 28 सीट जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह विपक्ष में बैठने के लिए तैयार है।
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पार्टी नेता योगेंद्र यादव से जब पूछा गया कि भाजपा विपक्ष में बैठने की बात कर रही है, तो उन्होंने कहा, "मुझे यह थोड़ा अजीब लग रहा है कि पहले नंबर पर आने वाली पार्टी, दूसरे पायदान पर खड़े दल को सरकार बनाने के लिए कह रही है।"
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आप बोली भाजपा बनाए सरकार
सरकार बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा, "अगर उप राज्यपाल हमें बुलाते हैं, तो हम बताएंगे कि हमारे पास 28 विधायक हैं और 36 की संख्या तक हम नहीं पहुंच रहे। आप को अगली सरकार बनाने का जनादेश नहीं मिला है और ऐसा करना गलत होगा।"
सोमवार सवेरे हुई आप की बैठक में भी यही फैसला हुआ। आप नेता मनीष सिसोदिया ने बैठक के बाद बताया कि उनका दल विपक्ष में बैठने के लिए तैयार है।
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सिसोदिया ने साफ कर दिया कि जैसे वह अब तक कहते आ रहे थे, न किसी को समर्थन देंगे और न किसी से समर्थन लेंगे। दिल्ली की जनता ने कुछ ऐसे आंकड़े सामने रखे हैं कि मामला बुरी तरह फंस गया है।
भाजपा में भी चर्चा जारी
भाजपा भी गहन मंत्रणा में लगी है। पार्टी नेता विजय गोयल का कहना है कि भाजपा अभी सोच-विचार कर रही है और अंतिम फैसला होने पर बताया जाएगा।
भाजपा के सीएम पद के दावेदार डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को ही साफ कर दिया था कि उन्हें स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, ऐसे में सरकार बनाने की कोशिश कैसे कर सकते हैं।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, "जनता का प्यार हमें मिला है, लेकिन पर्याप्त नंबर नहीं। हम विपक्ष में बैठने को तैयार हैं।" दिल्ली में ऐसा पहली बार है कि दो सबसे बड़े दल सरकार बनाने के बजाय विपक्ष में बैठने की बात कर रहे हैं।
बहुमत से दोनों रह गईं दूर
जनता ने किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया है। सरकार बनाने के लिए 36 सीटें चाहिए, जबकि भाजपा को 32, आप को 28, कांग्रेस को 8 व अन्य को दो सीटें मिली हैं।
व्यवस्था के अनुरूप उपराज्यपाल नजीब जंग बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, लेकिन भाजपा सरकार बनाने से हाथ खींच रही है। दूसरी बड़ी पार्टी आप है जो जादुई आंकड़े से दूर है। भाजपा नेता व आप नेता सरकार बनाने के लिए मना करके एक-दूसरे को चेक कर रहे हैं।
बहुमत साबित करना होगा
पार्टी की बैठकों में राष्ट्रपति शासन लगने व विधानसभा भंग होने के नफा-नुकसान पर चर्चा हो रही है। अगर दोनों पार्टी सरकार नहीं बनाती हैं तो उपराज्यपाल नजीब जंग के पास राष्ट्रपति को संविधान की धारा 239ए के तहत राज्य की व्यवस्था रद्द करने की सिफारिश करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है।
लोकसभा व दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव सुदर्शन कुमार शर्मा बताते हैं कि चुनाव आयोग सबसे पहले विधानसभा के गठन की अधिसूचना जारी करेगा। अधिसूचना के बाद उपराज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे।
अगर भाजपा तैयार होती है तो उनके नेता को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाकर बहुमत सिद्ध करने के लिए समय दिया जाएगा। अगर मना करते हैं तो दूसरे नंबर की पार्टी आप को आमंत्रित करने की व्यवस्था है। अगर आप के नेता भी मना करते हैं तो उपराज्यपाल राष्ट्रपति से सिफारिश कर सकते हैं।
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ऐसे में राष्ट्रपति शासन के नाम पर सीधे सत्ता गृहमंत्रालय के पास चली जाएगी। ऐसे में उपराज्यपाल सलाहकार की मदद से दिल्ली का शासन चला सकते हैं।
भाजपा फिर से चुनाव लड़ने के पक्ष में
भाजपा की कोर कमेटी की रविवार को हुई बैठक में कहा गया कि तोड़फोड़ से सरकार बनी तो इसका संदेश आम जनता में ठीक नहीं जाएगा। पार्टी के लिए फिर से चुनाव में जाना ज्यादा बेहतर है।
पार्टी का यह भी मानना है कि उसका सीधा मुकाबला अब ‘आप’ से ही है। लोकसभा चुनाव के साथ ही अगर विधानसभा का चुनाव होता है तो नरेंद्र मोदी की लहर भी उस वक्त पार्टी के काम आएगी।
फिलवक्त सरकार का खजाना खाली है। ‘आप’ के विधायकों का हस्तक्षेप भी बराबर रहेगा। ऐसी स्थिति में जनता के सामने खरा उतरना मुश्किल होगा।
सरकार बनाने में क्या है बाधा
आम आदमी पार्टी की धमाकेदार मौजूदगी से भाजपा सरकार बनाने से कतरा रही है। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भी भाजपा को यह डर है कि जोड़तोड़ से सरकार बनी तो मंत्री पद के दावेदारों की फौज खड़ी हो जाएगी।
अपने पुराने अनुभवों से सबक लेते हुए पार्टी के नेताओं का कहना है कि जोड़तोड़ करके सरकार चलाना बेहद ही मुश्किल होता है। लोकसभा चुनाव भी नजदीक है।
सरकार अगर बनती है तो जनता के सामने फजीहत होगी और केंद्र में वापसी बेहद ही मुश्किल हो जाएगी।