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चिंता: 10 बिंदुओं में जानिए, पाकिस्तान की अफगानिस्तान में बढ़ती सक्रियता भारत समेत दुनिया के लिए कितनी खतरनाक

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Mon, 06 Sep 2021 03:16 PM IST

सार

पाकिस्तान तालिबान का सबसे बड़ा मददगार है, यह पूरी दुनिया जान चुकी है। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि पाकिस्तान तालिबान का इस्तेमाल उसके खिलाफ कर सकता है। तालिबान के पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए भारत की यह चिंता बेजा नहीं है। 
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : twitter.com/ImranKhanPTI
तालिबान ने अफगानिस्तान के अभेद्य पंजशीर इलाके में कब्जे का दावा कर दिया है। तालिबान का दावा है कि उसने पंजशीर के गवर्नर हाउस पर अपना झंडा भी लहरा दिया है। हालांकि नॉर्दर्न एलायंस ने तालिबान के इस दावे को गलत बताया है। नॉर्दर्न एलायंस का कहना है कि पाकिस्तान की मदद से तालिबान पंजशीर में घुसने में जुटा हुआ है। तालिबान के काबुल पर कब्जे से पहले भी पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी कई बार यह आरोप लगा चुके थे कि पाकिस्तान तालिबान की हर तरह से मदद कर रहा है और उसकी मदद के लिए अपने लड़ाकों को अफगानिस्तान भेज रहा है।

पंजशीर पर तालिबान के कब्जे के दावे के बारे में भी यह रिपोर्ट भी आ रही है कि पाकिस्तान ने पंजशीर पर कब्जे के लिए तालिबान लड़ाकों की मदद के लिए अपनी स्पेशल फोर्स भेजी है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में जिस तरह से सक्रिय है वह भारत और दूसरे देशों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। हमने विशेषज्ञों की मदद से इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की है।  10 बिंदुओं में समझिए कि पाकिस्तान की अफगानिस्तान में बढ़ती सक्रियता भारत समेत दुनिया के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।


1. तालिबान में कठपुतली सरकार चाहेगा पाकिस्तान
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान चाहेगा कि तालिबान में ऐसी सरकार बने जो उनके हाथों के इशारे पर नाचने वाली कठपुतली की तरह हो। इससे पाकिस्तान तालिबान के जरिए अपनी मनमानी करेगा और उसके निशाने पर होगा भारत। पाकिस्तान कश्मीर को लेकर तालिबान को बड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर कर सकता है। बदले में पाकिस्तान अफगानिस्तान को देश चलाने के लिए हर संभव मदद मुहैया कराने का वादा करेगा। इसलिए आशंका है कि तालिबान कश्मीर पर कभी भी अपना पैंतरा बदल सकता है।  

2. पाकिस्तान की मंशा भारत को चोट पहुंचाने की
रक्षा विशेषज्ञ कमर आगा कहते हैं तालिबान की फिर वापसी होना पाकिस्तान के लिए सुनहरा अवसर है और भारत समेत दुनिया के लिए कई देशों के लिए बड़ा खतरा। वे कहते हैं, अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होना कोई आसान बात नहीं है, पहले दिन से इस सब के पीछे पाकिस्तान है। अमेरिकी चुपचाप चले गए, पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी भाग गए, अफगान सेना ने हथियार डाल दिए और इस सब में पाकिस्तान का हाथ रहा है। तालिबान पाकिस्तान की मदद से अफगानिस्तान पर कब्जा कर पाया है, और इस सबके पीछे पाकिस्तान की बस एक ही मंशा है भारत को चोट पहुंचाने की। पाकिस्तान के इशारे पर अलकायदा ने कश्मीर की आजादी की बात कर ही दी है और देर-सबेर तालिबान भी कश्मीर का राग गाएगा। 
 
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : twitter.com/ImranKhanPTI
तालिबान ने अफगानिस्तान के अभेद्य पंजशीर इलाके में कब्जे का दावा कर दिया है। तालिबान का दावा है कि उसने पंजशीर के गवर्नर हाउस पर अपना झंडा भी लहरा दिया है। हालांकि नॉर्दर्न एलायंस ने तालिबान के इस दावे को गलत बताया है। नॉर्दर्न एलायंस का कहना है कि पाकिस्तान की मदद से तालिबान पंजशीर में घुसने में जुटा हुआ है। तालिबान के काबुल पर कब्जे से पहले भी पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी कई बार यह आरोप लगा चुके थे कि पाकिस्तान तालिबान की हर तरह से मदद कर रहा है और उसकी मदद के लिए अपने लड़ाकों को अफगानिस्तान भेज रहा है।

पंजशीर पर तालिबान के कब्जे के दावे के बारे में भी यह रिपोर्ट भी आ रही है कि पाकिस्तान ने पंजशीर पर कब्जे के लिए तालिबान लड़ाकों की मदद के लिए अपनी स्पेशल फोर्स भेजी है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में जिस तरह से सक्रिय है वह भारत और दूसरे देशों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। हमने विशेषज्ञों की मदद से इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की है।  10 बिंदुओं में समझिए कि पाकिस्तान की अफगानिस्तान में बढ़ती सक्रियता भारत समेत दुनिया के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।

1. तालिबान में कठपुतली सरकार चाहेगा पाकिस्तान
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान चाहेगा कि तालिबान में ऐसी सरकार बने जो उनके हाथों के इशारे पर नाचने वाली कठपुतली की तरह हो। इससे पाकिस्तान तालिबान के जरिए अपनी मनमानी करेगा और उसके निशाने पर होगा भारत। पाकिस्तान कश्मीर को लेकर तालिबान को बड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर कर सकता है। बदले में पाकिस्तान अफगानिस्तान को देश चलाने के लिए हर संभव मदद मुहैया कराने का वादा करेगा। इसलिए आशंका है कि तालिबान कश्मीर पर कभी भी अपना पैंतरा बदल सकता है।  

2. पाकिस्तान की मंशा भारत को चोट पहुंचाने की
रक्षा विशेषज्ञ कमर आगा कहते हैं तालिबान की फिर वापसी होना पाकिस्तान के लिए सुनहरा अवसर है और भारत समेत दुनिया के लिए कई देशों के लिए बड़ा खतरा। वे कहते हैं, अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होना कोई आसान बात नहीं है, पहले दिन से इस सब के पीछे पाकिस्तान है। अमेरिकी चुपचाप चले गए, पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी भाग गए, अफगान सेना ने हथियार डाल दिए और इस सब में पाकिस्तान का हाथ रहा है। तालिबान पाकिस्तान की मदद से अफगानिस्तान पर कब्जा कर पाया है, और इस सबके पीछे पाकिस्तान की बस एक ही मंशा है भारत को चोट पहुंचाने की। पाकिस्तान के इशारे पर अलकायदा ने कश्मीर की आजादी की बात कर ही दी है और देर-सबेर तालिबान भी कश्मीर का राग गाएगा। 
 

तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला गनी बरादर का 2019 में इस्लामाबाद में स्वागत करते पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी। - फोटो : Pakistan Foreign Office
3. तालिबान को पाकिस्तान का समर्थन मिलना भारत की संप्रभूता और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल ए जे बी जैनी (सेवानिवृत्त) का मानना है कि आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं। पाकिस्तान के इशारों पर तालिबान अगले तीन महीनों के भीतर कश्मीर में घुसने की कोशिश कर सकता है। जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे भारत विरोधी आंतकवादी समूह का केंद्र अफगानिस्तान ही रहा है और अब इन संगठनों का हौसला और बढ़ेगा। पाकिस्तान तालिबान और अलकायदा के जरिए भारत में  जिहादी आतंकवादियों को भेजने के लिए उन्हें प्रशिक्षित कर सकता है। पाकिस्तान के समर्थन के कारण ये जिहादी संगठन बेकाबू हो सकते हैं और इसका सबसे ज्यादा खतरा भारत की सुरक्षा को है। रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) मानते हैं कि निश्चित तौर पर इससे भारत में आतंकवाद बढ़ेगा और इस मोर्चे पर भारत की चुनौती बहुत बढ़ने वाली है। 

4. तालिबान को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने में पाकिस्तान करेगा मदद
जैनी मानते हैं तालिबान अपनी नई सरकार के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है। वह इसके लिए बहुत बेचैन है। कई देशों से उसकी बातचीत चल रही है, और वह अपने प्रतिनिधियों को यहां-वहां भेज रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मान्यता दिलाने में पाकिस्तान उसकी मदद कर सकता है। अमेरिकी हथियार और उपकरण के अलावा तालिबान के पास अभी कुछ भी नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था ढह गई है, वह भिखमंगा बना हुआ है। उसे देश चलाने के लिए पैसा चाहिए। पाकिस्तान, तालिबान को विदेशी एजेंसियों से वित्तीय सहयोग दिलाने में  भी सहयोग कर सकता है। 

5. पाकिस्तान फ्रंट लाईन देश बन जाएगा, अमेरिका भी इसकी ओर ही देखेगा
अफगानिस्तान में जाने के लिए अमेरिका ने भारत के बजाए  पाकिस्तान का रास्ता चुना था। अब भी चीन को काबू में रखने के लिए उसके पास पाकिस्तान ही एक जरिया है। इसलिए धीरे-धीरे पाकिस्तान फिर अमेरिका के करीब जाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में पाकिस्तान फ्रंट लाइन देश बन जाएगा। यह पाकिस्तान की विदेश नीति की सफलता मानी जा सकती है। इसलिए पाकिस्तान के नेता बार-बार कह रहे हैं कि दुनिया में उसकी हैसियत बढ़ने वाली है। 

6. गोरिल्ला युद्ध होने का डर
कमर आगा कहते हैं कि जिस तरह पाकिस्तान हिंसा भड़काने से लेकर कब्जा करने तक में तालिबान की कदम-कदम पर मदद कर रहा है, उससे यह जाहिर होता है कि भविष्य में भी तालिबान पाकिस्तान पर पूरी तरह निर्भर रहेगा। पंजशीर पर कब्जे के लिए पाकिस्तान ने ही ड्रोन और हेलिकॉप्टर भेज कर मदद की है। पंजशीर में खाने-पीने और दवाईयों की आपूर्ति रोक दी गई, यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध है। इससे गोरिल्ला वॉर शुरू हो सकता है। लेफ्टिनेट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) कहते हैं कि पंजशीर पर कब्जे को लेकर पाकिस्तान ने जिस तरह का अभद्र प्रदर्शन किया है, वह पूरी दुनिया को देखना चाहिए। वहीं जैनी कहते है कि ऐसी रिपोर्ट मिली है कि पंजशीर में उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान के लड़ाके भी थे जो नार्दन अलायंस की मदद कर रहे थे। अब ये दोनों देश तालिबान पर जवाबी कार्रवाई की रणनीति बना सकते हैं जिससे इन क्षेत्रों में अशांति पैदा हो सकती है।
 

चीन पकिस्तान तालिबान - फोटो : twitter
7- भारत और मध्य एशिया में अशांति फैलने का भय 
कमर आगा यह भी मानते हैं कि तालिबान के पास सभ्य तरीके से मुल्क चलाने का न तो कोई अनुभव है। उसके पास विकास का कोई एजेंडा है। केवल धार्मिक एजेंडा से देश नहीं चलाया जा सकता है। उसे सहयोग देने वाला केवल पाकिस्तान है जो खुद आतंकवाद और अशांति को बढ़ावा देने वाला देश है, ऐसे में आतंकवाद और हिंसा में विश्वास करने वाली दो सरकारें यदि मिल जाएं तो भारत और अफगानिस्तान के अन्य पड़ोसी देशों को कितना नुकसान पहुंच सकता है, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान और तालिबान दोनों पर सख्त पाबंदियां लगा देनी चाहिए, क्योंकि मध्य एशिया में हालात और खराब हो सकते हैं। इस मुद्दे पर तुरंत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक होनी चाहिए और इस पर चर्चा होनी चाहिए।  

8-चीन, पाकिस्तान और तालिबान की तिकड़ी भारत के लिए चुनौती
पाकिस्तान और चीन में घनिष्ठता बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान और चीन दोनों भारत के धुर विरोधी देश है और अब तालिबान के आने से उनकी सक्रियता बढ़ेगी। दोनों ही देशों से भारत की संप्रुभता को खतरा है। अब पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार की एक तिकड़ी बनेगी, जो भारत के लिए गंभीर रणनीतिक चुनौती खड़ी करेगी। ये दोनों ही देश अफगानिस्तान में भारत का प्रभाव कम करने और अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में जुटेंगे।

9- जो मान्यता नहीं देगा वहां अस्थिरता फैला सकता है तालिबान
कमर आगा कहते है कि तालिबान के आने से मध्य एशिया में उथल-पुथल मचने का डर है। तालिबान अपने उन पड़ोसी देशों में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर सकता है जो उसे मान्यता देने या विदेशी सहायता देने से इंकार करेगा। इसलिए तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान के कई पड़ोसी देशों में तनाव पसर गया है। रूस की तजाकिस्तान के साथ एक सुरक्षा संधि है, और अफगानिस्तान में अराजक स्थिति उत्पन्न होने से वहां और अधिक सैनिकों को तैनात कर दिया गया है। रूस ने इस महीने अफगान सीमा के पास उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान के साथ अभ्यास किया था। रूस ने नए बख्तरबंद वाहनों और मिसाइलों के साथ तजाकिस्तान में अपने सैन्य अड्डे को भी मजबूत कर लिया है। आगा मानते हैं, भारत को रूस और ईरान के साथ अपने संबंधों को लेकर नई रणनीति बनानी होगी। भारत रूस और ईरान के साथ मिलकर तालिबान और पाकिस्तान को लेकर संयुक्त रणनीति बनाने पर विचार कर सकता है।  

10- पाकिस्तान की शह पर भारत में शरणार्थी के रूप में जेहादी भी आ सकते हैं
अफगानिस्तान से बड़ी संख्या में शरणार्थी दूसरे देशों में पनाह ले रहे हैं। जैनी कहते हैं पाकिस्तान की शह पर शरणार्थियों के बहाने जेहादी भी भारत भेजे जा सकते हैं, ऐसे में देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। ईरान को भी इस बात का डर है कि तालिबान शासन आने से उसके यहां शरणार्थियों और नशीली दवाओं की बाढ़ आ सकती है। तजाकिस्तान की लगभग यही चिंता है कि शरणार्थी, नशीली दवाईयों की तस्करी के साथ-साथ उसे सीमा पार आतंकवाद का भी सामना करना पड़ सकता है।

 
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