पंजशीर ने इससे पहले भी तालिबान और सोवियत रूस की सेनाओं के खिलाफ लड़ाईयां लड़ी हैं। उस समय उसे अहमद शाह मसूद का नेतृत्व प्राप्त था। अपने नेतृत्व के दम पर ही उन्होंने पंजशीर को अजेय बनाए रखा और दोनों सेनाओं को खदेड़ दिया लेकिन, इस बार पंजशीर के पास न तो पर्याप्त मात्रा में हथियारों का जरीखा था और न ही मजबूत नेतृत्व।
सरकार को सौंप दिए थे हथियार
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि अहमद शाह मसूद के समय पंजशीर के लड़ाकों ने अपने हथियार सरकार को सौंप दिए थे। दरअसल, लड़ाकों ने अपने हथियार, गोला-बारूद सरकार के पास जमा करा दिया था। इसलिए, इस बार की लड़ाई में उनके पास पर्याप्त और आधुनिक हथियार नहीं थे। हालांकि, यह भी दावा किया जाता रहा है कि सरकार में पंजशीर के समर्थकों ने उन्हें हथियारों की सप्लाई जारी रखी। एक मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से अहमद मसूद ने कहा था कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में हथियार हैं। क्योंकि, हम जानते थे कि ऐसी परिस्थिति कभी भी आ सकती है।
पहाड़ियों से घिरे पंजशीर को प्राकृतिक सुरक्षा प्राप्त है। इसीलिए, इस घाटी पर अब तक कोई कब्जा नहीं जमा पाया था, लेकिन इस बार तालिबान से हुई लड़ाई में पंजशीर चारों ओर से घिर चुका था। काबुल पर तालिबान का कब्जा होने के बाद उसे बाहर से कोई मदद मिल नहीं रही थी। दूसरी ओर तालिबान ने चारों ओर से घाटी को घेर कर वहां की सप्लाई को भी रोक दिया था।
पाकिस्तानी वायु सेना का मिला साथ
पंजशीर की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों को फतह करना किसी के लिए भी मुश्किल है। इस बार तालिबान को पाकिस्तानी वायु सेना का साथ मिला। खबरों के मुताबिक पंजशीर घाटी पर पाकिस्तानी वायु सेना के ड्रोनों ने हमला किया, इससे अचानक से युद्ध की स्थिति बदल गई। उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने भी पाकिस्तान पर तालिबान की मदद का आरोप लगाया है।
तालिबान ने दावा किया है कि उसने प्रतिरोधी मोर्चे के मुख्य कमांडर मोहम्मद सालेह, प्रवक्ता फहीम दश्ती और अहमद मसूद के भतीजे अब्दुल वद्दू झोर को मार गिराया है। इसकी पुष्टि पंजशीर की ओर से भी की गई। इसी के बाद पंजशीर प्रतिरोधी मोर्चा पूरी तरह बैकफुट पर आ गया और संघर्ष विराम की अपील कर दी।
फिलहाल रुक गई लड़ाई
तालिबान के खिलाफ पंजशीर की लड़ाई फिलहाल रुक गई है। इस लड़ाई को रोकने की पहल पंजशीर की ओर से ही की गई थी, जिसके बाद तालिबान ने अपने लड़ाकों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है। खबरों के अनुसार, भारी नुकसान के बाद अहमद मसूद ने शांति वार्ता पर जोर दिया है। हालांकि, अभी यह सामने नहीं आया है कि सीजफायर किन शर्तों पर किया गया है।