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क्वाड बैठक पर वर्ल्ड मीडिया: भारत को बताया गठबंधन का भविष्य, कहा- अमेरिका का प्रभाव तय करने का सबसे अहम पल

Fri, 24 Sep 2021 07:11 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

सीएनएन के लेख में कहा गया, "यह बैठक अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच होगी, जिनका निहित हित इस वक्त एशिया में चीन के उभार का सामना करना है।"
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसा साल मार्च में भी क्वाड देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया था। - फोटो : PIB/एजेंसी
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विस्तार
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दुनियाभर में क्वाड बैठक को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 2007 में पहली बार अनाधिकारिक तौर पर अस्तित्व में आने के बाद यह पहला मौका है, जब इस गठबंधन का हिस्सा रहे चारों देश- भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के राष्ट्राध्यक्षों की एक साथ आमने-सामने मुलाकात होगी। इससे पहले भी यह नेता अलग-अलग या वर्चुअल तौर पर क्वाड से जुड़ी बैठकों में शामिल हुए हैं, लेकिन इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की तरफ से बुलाई गई क्वाड बैठक की अहमियत काफी बढ़ गई है।
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सीएनएन ने कहा- क्वाड आगे क्या करता है, यह पहले से भी ज्यादा अहम

क्वाड बैठक को लेकर दुनियाभर की मीडिया में चर्चाएं हैं। अमेरिकी मीडिया ग्रुप सीएनएन ने शुक्रवार को क्वाड पर चलाए अपने एनालिसिस को शीर्ष पर रखा। इसमें शुरुआत में ही कहा गया- "फ्रांस, ऑकस, न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन सब भूल जाइए। अमेरिका के एशिया में प्रभाव का भविष्य तय करने वाला सबसे अहम पल शुक्रवार को वॉशिंगटन में आएगा।" 

इसी लेख में आगे कहा गया- "यह बैठक अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच होगी, जिनका निहित हित इस वक्त एशिया में चीन के उभार का सामना करना है।" सीएनएन के मुताबिक, क्वाड आगे क्या करता है, यह पहले से भी ज्यादा अहम हो गया है। विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि क्वाड के बीच बेहतर निगरानी और निशाना बनाने वाली (टारगेटिंग) तकनीक का सहयोग भी जरूरी है। 

इसी लेख में एक विशेषज्ञ के हवाले से आगे कहा गया, "अगस्त में क्वाड के वरिष्ठ अफसरों ने पहली बार ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने को लेकर साझा बयान जारी किया। यह चीन के लिए जगाने वाला बयान होना चाहिए, क्योंकि अमेरिका के बाद ऑस्ट्रेलिया और जापान भी ताइवान पर बोल चुके थे। लेकिन भारत की तरफ से इस तरह का बयान कभी नहीं आया था।"

अल-जजीरा बोला- क्वाड में शामिल देशों के हित अलग, लेकिन चीन पर सब एक

उधर कतर के न्यूज मीडिया ग्रुप अल-जजीरा ने भी क्वाड बैठक से पहले लेख में कहा, "जानकार मानते हैं कि क्वाड समूह को अभी भी अपने पैर जमाने हैं। कई मामलों में गठबंधन में शामिल देशों के मकसद अलग-अलग रहे हैं, क्योंकि वे अपने क्षेत्रीय और वैश्विक हितों से भी घिरे रहे हैं। लेकिन चीन के मुद्दे पर सभी देशों ने चिंता जाहिर की है और अब चीन का जिक्र सीधे तौर पर भी शुरू कर दिया है।"

अल-जजीरा ने एक विशेषज्ञ के हवाले से कहा, "भारत को दक्षिण चीन सागर को लेकर ज्यादा चिंता नहीं है, लेकिन वह अपनी जमीनी और समुद्री सीमा की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। क्वाड देशों में भारत इकलौता है, जो कि चीन के साथ जमीनी सीमा साझा करता है। यानी आगे भारत क्वाड के साथ कैसा रिश्ता रखता है, यह इस गठबंधन और पूरे क्षेत्र के भविष्य के लिए निर्णायक होगा।"

गार्जियन ने कहा- चीन को सीमित रखने की नीति के साथ क्षेत्रीय समर्थन जुटाएंगे बाइडन

ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने क्वाड बैठक को लेकर शीर्षक में कहा, "क्वाड समिट में बाइडन चीन को सीमित रखने की नीति के साथ क्षेत्रीय समर्थन जुटाएंगे।" इस लेख में कहा गया कि बाइडन तीनों देशों के नेताओं से मिलकर निरंकुश तानाशाही को रोकने के लिए लोकतंत्र समर्थकों के गठबंधन का जाल बनाने की कोशिश में हैं। क्वाड साझेदारों के बीच क्षेत्र में बढ़ता सहयोग चीन की नजरों से नहीं बचा होगा। अमेरिका ने इसी साल भारत के साथ जबरदस्त सैन्य अभ्यास किया और ऑस्ट्रेलिया को परमाणु सबमरीन भले ही 20 साल में मिलें, लेकिन यह तकनीक को साझा करने में एक अहम समझौता है। 
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यूएसए टुडे बोला- क्वाड के ताकतवर बनने के लिए चीन जिम्मेदार

अमेरिकी अखबार यूएसए टुडे में क्वाड पर चर्चा की गई। इसमें कहा गया- "चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक ताकत एजेंडे में नहीं है, पर चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा वही होगा। अखबार ने एक विशेषज्ञ के हवाले से लिखा, "क्वाड के भी ताकतवर संगठन बनने के पीछे चीन ही जिम्मेदार है। चीन ने ही अपनी सैन्य आक्रामकता और दबाव की राजनीति के जरिए इन चारों देशों को अपने विवाद भुलाने और साथ आकर चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के लिए प्रेरित किया।" अखबार ने आखिर में एक रिटायर्ड डिप्लोमैट के हवाले से कहा कि क्वाड आने वाले समय में सिर्फ शीत युद्ध ही नहीं, बल्कि चीन के साथ किसी देश का टकराव रोकने वाला गठबंधन होगा।
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