दुनिया में कोरोना वायरस चीन से वुहान शहर से फैला, जिसके बाद चीन को इसका दोषी ठहराया गया और देश पर कई तरह के आरोप लगाए गए। जिस समय विश्व स्वास्थ्य संगठन के जांचकर्ता ये पता लगाने के लिए वुहान शहर पहुंचे कि वहां से कोरोना वायरस कैसे फैला, उस समय शहर ली वेनलियांग को याद कर रहा था, जिनकी मौत एक साल पहले हुई थी।
बता दें कि ली चीन के वैज्ञानिक थे और पहले मुखबिर थे, जिन्होंने वायरस के बारे में लोगों को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ये वायरस शहर में हजारों और दुनिया में लाखों लोगों की जान लेगा। इसके बाद प्रशासन ने उन्हें ये खुलासा करने की सजा दी और आखिरकार वो खुद इस वायरस की चपेट में आ गए।
ली की मृत्यु के एक साल बाद एक अद्भुत दृश्य देखा गया। ली जिस अस्पताल में काम करते थे वहां एक आदमी हाथों में फूल लिए अस्पताल के बाहर खड़ा था। वुहान में 76 दिन का लॉकडाउन लगा था। कुछ मामले ऐसे भी थे, जिनमें पूरा परिवार वायरस की चपेट में आ गया और बच नहीं सका।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो चीन के वुहान शहर में लोगों के मन में कोरोना को लेकर अभी डर बसा हुआ है। कई लोग इसके बारे में खुलकर बात करना नहीं चाहते, जबकि कुछ लोग करते हैं। वुहान शहर में स्थानीय लोग दो गुटों में बंट गए, एक वो जो कोरोना से संबंधित कुछ भी याद रखना नहीं चाहते और दूसरे वो जिन्होंने कुछ भी भुलाना नहीं चाहा।
काफी मशक्कत के बाद चीन किसी बाहरी से वुहान लैब की जांच कराने के लिए राजी हुआ, ताकि ये पता लगाया जा सके कि जानवरों से इंसान तक कोरोना वायरस कैसे फैला। पिछले साल मई में विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम वुहान शहर के दौरे पर थी।
संगठन के जांचकर्ताओं ने बताया कि उन्हें प्रशासन की ओर से हर तरह की मदद मुहैया कराई गई। वुहान में लॉकडाउन के एक साल पूरा होने के बाद वहां जीवन अब सामान्य पटरी पर दौड़ रहा है। पिछले साल आई महामारी के बाद वुहान के लोग अब एकजुट हो गए हैं।