जब एक देश का अपराधी भागकर दूसरे देश में छिप जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय नियम के अनुसार पहले देश की पुलिस दूसरे देश में जाकर उसे नहीं पकड़ सकती। इंटरपोल ही ऐसे खतरनाक अपराधियों का पता लगाती है। हर देश में इंटरपोल के कुछ कर्मचारी होते हैं, विश्व के अलग-अलग देशों की राजधानियों में हर वर्ष इंटरपोल के प्रमुख अधिकारियों की बैठक होती है।
इंटरपोल की वेबसाइट पर मोस्ट वांटेड लोगों की सूची में 160 भारतीयों के नाम हैं। इंटरपोल के पास आठ प्रकार के नोटिस जारी करने का अधिकार होता है। भारत ने कई ऐसे अपराधियों के खिलाफ नोटिस जारी किए थे।
अलग-अलग रंगों के नोटिस
इंटरपोल नोटिस सूचना के आदान-प्रदान की पद्धति है। जब कोई सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग या सचेत करने का आवेदन करता है, तब नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के आग्रह पर इंटरपोल का जनरल सेक्रेट्रिएट नोटिस जारी करता है। इंटरपोल आठ प्रकार के नोटिस जारी करता है, जो अपने रंगों से पहचाने जाते हैं।
- लाल नोटिस आमतौर पर किसी अपराधी की गिरफ्तारी और उसके प्रत्यपर्ण के लिए होता है।
- नीला नोटिस किसी व्यक्ति के बारे में अतिरिक्त सूचना देने या पाने के लिए जारी किया जाता है।
- हरा नोटिस ऐसे व्यक्तियों के बारे में चेतावनी जो अपराध कर चुके हैं और आशंका है कि वे दूसरे देश में जाकर भी अपराध कर सकते हैं।
- पीला नोटिस गुमशुदा (आमतौर पर नाबालिगों) के बारे में सूचनाएं देने के लिए प्रकाशित किया जाता है।
- काला नोटिस किसी लाश की शिनाख्त न होने पर जारी होता है।
- नारंगी नोटिस बमों, पार्सल बमों आदि की सूचना देने के लिए जारी होता है।
- बैंगनी रंग का नोटिस अपराध के तरीके, वस्तुएं, डिवाइस और अपराधियों द्वारा बचने के लिए उपयोग किए गए तरीकों के इस्तेमाल के लिए जारी किया जाता है।
इंटरपोल मुख्य रूप से इन तीन प्रकार के अपराधों के लिए अपनी पुलिस विशेषज्ञता और क्षमताओं का इस्तेमाल करता है।
- काउंटर-टेरेरिज्म
- साइबर अपराध
- संगठित अपराध
इंटरपोल के तथ्य
- 192 देश फिलहाल इंटरपोल के सदस्य हैं।
- 160 भारतीय हैं वांटेड लिस्ट में।
- 650 भारतीय शामिल हैं इंटरपोल की सूची में।
- 942 करोड़ रुपये है सालाना बजट।
- 650 भारतीय शामिल हैं इंटरपोल की सूची में।
- 1949 में भारत बना सदस्य।
1923 में हुई थी शुरुआत
प्रथम विश्व-युद्ध के बाद यूरोप में अपराधियों की संख्या काफी बढ़ गई। ऑस्ट्रिया के कुछ अपराधी दूसरे देशों में जा चुके थे। नियम के अनुसार ऑस्ट्रिया की पुलिस दूसरे देश की सीमा में नहीं जा सकती थी। ऐसे अपराधियों को पकड़ने के लिए सन् 1923 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में कई देशों के पुलिस अधिकारियों की बैठक बुलाई। अपराधों की रोकथाम में सहयोग करने के लिए 20 देशों ने मिलकर इंटरपोल की स्थापना की थी।
1938 में जर्मनी ने ऑस्ट्रिया पर हमला किया और इसी के साथ इंटरपोल का भी खात्मा हो गया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इंटरपोल एक तरह से ठप्प रहा। इस विश्व युद्ध के बाद बेल्जियम पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल क्लोरेंट लुवागे ने इंटरपोल को फिर से जीवित किया। बेल्जियम में सुविधाओं की कमी के कारण इसका मुख्य कार्यालय नहीं बन पाया, बाद में ल्यों (पेरिस) में बनाया गया। 1955 में लगभग 55 देश इंटरपोल के सदस्य बन चुके थे। 1956 में इंटरपोल का नया संविधान बनाया गया।