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China: ऑकस पनडुब्बी समझौते को ताइवान से जोड़ने की योजना पर तमतमाया ड्रैगन; अमेरिका को दी चेतावनी

Tue, 09 Apr 2024 07:45 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

China:अमेरिकी उप विदेश मंत्री के हवाले से आई खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी की टिप्पणी संघर्ष की आग को भड़का सकती है और उनके इरादे दुर्भावनापूर्ण हैं।
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चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग - फोटो : fmprc.gov.cn
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विस्तार
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चीन ने मंगलवार को कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच ऑकस पनडुब्बी समझौते में ताइवान को जोड़ने की जो बाइडन प्रशासन की किसी भी योजना का विरोध करेगा। बीजिंग ने कहा कि यह परमाणु प्रसार को जोखिम में डालेगा और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हथियारों की दौड़ बढ़ाएगा। 
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संघर्ष को भड़का सकती है अमेरिकी अधिकारी की टिप्पणी: चीन
अमेरिकी उप विदेश मंत्री के हवाले से आई खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी की टिप्पणी संघर्ष की आग को भड़का सकती है और उनके इरादे दुर्भावनापूर्ण हैं। निंग ने कहा, चीन इससे संतुष्ट नहीं है और इसका कड़ा विरोध करता है। उन्होंने कहा कि इससे परमाणु प्रसार का खतरा बढ़ सकता है और एशिया प्रशांत क्षेत्र में हथियारों की होड़ बढ़ सकती है, जिससे क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता कमजोर हो सकती है। चीन इस स्व-शासित द्वीप पर दावा करता है और इसे मुख्य भूमि से जोड़ने की बात करता रहा है। 
  
अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने क्या दिया था बयान
अमेरिकी उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने पिछले हफ्ते वॉशिंगटन में 'सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी'थिंक टैंक को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि ऑकस पनडुब्बी परियोजना ताइवान के खिलाफ चीन के किसी भी कदम को रोकने में मदद कर सकती है। कैंपबेल ने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया द्वारा पनडुब्बियों (परमाणु संचालित) के अधिग्रहण से जुड़ा 2023 का ऑक्स समझौता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के  प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने कहा था कि ताइवान और ऑकस के बीच दुर्लभ संबंध हैं, जिसमें क्रॉस जलडमरूमध्य भी शामिल है जो चीन और ताइवान को अलग करता है। उन्होंने कहा था कि नई पनडुब्बियों की क्षमताएं शांति और स्थिरता को बढ़ाएंगी। 
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ताइवान चीन का अविभाज्य हिस्सा: चीनी विदेश मंत्रालय
माओ निंग ने कहा कि ताइवान चीन का एक अविभाज्य हिस्सा है और यह उसका आंतरिक मामला है, जिसमें दखल देने का किसी भी बाहरी ताकत को अधिकार नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने पूछा, ताइवान को तथाकथित त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी वाली पनडुब्बी योजना से जोड़ने की कोशिश में अमेरिका का क्या इरादा है? उन्होंने कहा कि अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की चीन इच्छाशक्ति अटूट है और किसी को भी इसे कम करने नहीं आंकना चाहिए। माओ ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया दक्षिण चीन सागर विवाद में सीधे तौर पर पक्षकार नहीं है। उन्हें बातचीत और विचार-विमर्श के जरिए मुद्दे सुलझाने के लिए संबंधित पक्षों के प्रयासों में दखल नहीं देना चाहिए। 
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