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अमेरिका को सता रही है फिर से अल-कायदा के उठ खड़े होने की चिंता, तालिबान भी देगा साथ

Fri, 13 Aug 2021 02:53 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

मरीन जनरल फ्रैंक मेकेंजी ने कहा कि उस क्षेत्र में अमेरिका का मुख्य ध्यान अभी भी अल-कायदा पर ही है। खास कर पूर्वी अफगानिस्तान में ऐसी स्थिति है। ये गुट वहां संगठित हुए, तो वे फिर से हमारी मातृभूमि पर हमले की साजिश रच सकते हैं। ये खतरा आज भी बना हुआ है।
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अलकायदा - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अमेरिकी अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां आतंकवादी गुट अल-कायदा फिर से खड़ा हो सकता है। इन अधिकारियों के मुताबिक बीते 20 सालों तक अमेरिका और नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) की सेनाओं के अफगानिस्तान में तैनात रहने के कारण अल-कायदा की ताकत बहुत घट गई। लेकिन आज भी उसके 200 से 300 सदस्य सक्रिय हैं।

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अमेरिका के रक्षा अधिकारियों को चिंता है कि अमेरिकी फौज की वापसी से अल-कायदा को फिर से खड़ा करने का मौका मिल सकता है। ऐसा ही अवसर दूसरे दहशतगर्द गुटों भी मिल सकता है। इन अधिकारियों ने टीवी चैनल एनबीसी से कहा कि अगर काबुल में तालिबान की सरकार बन गई, तो अल-कायदा के बारे में अमेरिका को खुफिया जानकारियां मिलने के बहुत कम स्रोत बचेंगे। अमेरिका ने कहा है कि अफगानिस्तान में अल-कायदा या किसी दूसरे आतंकवादी गुट के अड्डों के बारे में खबर मिलने पर वह उन पर हवाई हमले करेगा। लेकिन रक्षा अधिकारियों का कहना है कि असल समस्या ऐसी जानकारी मिलने में आएगी।



पिछले महीने अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी फौजियों की कमान मरीन जनरल फ्रैंक मेकेंजी ने संभाली थी। उसके बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उस क्षेत्र में अमेरिका का मुख्य ध्यान अभी भी अल-कायदा पर ही है। उन्होंने कहा था- ‘हम यहां मौजूद ही इसलिए हैं ताकि अल-कायदा और आईएसआईएस उन क्षेत्रों में अपने को फिर से संगठित नहीं कर सकें, जहां किसी का शासन नहीं है। खास कर पूर्वी अफगानिस्तान में ऐसी स्थिति है। ये गुट वहां संगठित हुए, तो वे फिर से हमारी मातृभूमि पर हमले की साजिश रच सकते हैं। ये खतरा आज भी बना हुआ है।’

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विश्लेषकों का कहना है कि जिस दौर में अल-कायदा अपने को फिर से संगठित करेगा, संभव है कि उसकी उसी वक्त अमेरिका को खबर न मिले। उनका कहना है कि हालांकि अल-कायदा का मकसद पश्चिमी देशों के खिलाफ ही हमले करना है, लेकिन अभी अफगानिस्तान के लड़ाकू गुटों का यह फौरी मकसद नहीं है। एक अधिकारी ने एनबीसी से कहा- ‘उन्होंने यह समझा है कि पहले जरूरत अपने घर में अपने पांव जमा लेने की है। उसके बाद वे वैश्विक जिहाद के लिए सोचेंगे, जो बात आज भी उनके दिमाग में है।’

अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि अल-कायदा निकट भविष्य में इतना ताकतवर नहीं हो पाएगा, जिससे वह विदेशी जमीन पर जाकर हमले कर सके। एक अधिकारी ने कहा- ‘मेरी राय में अगले 12 महीनों तक उसके ऐसा कर पाने का खतरा कम ही रहेगा।’ लेकिन अधिकारियों की राय है कि जब अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बन जाएगी, जब अल-कायदा के फिर से संगठित होने की राह में कोई रुकावट नहीं बचेगी। अपनी ताकत बढ़ाने के बाद वह विदेशों में हमला करने की साजिश रचने लगेगा।

मेकेंजी ने पिछले महीने दिए अपने इंटरव्यू में कहा था कि उनकी राय में तालिबान अल-कायदा को फिर से संगठित होने से नहीं रोकेगा। उन्होंने कहा- ‘मुझे ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं, जिससे मुझे भरोसा हो कि तालिबान ऐसा करेगा। मैं जानता हूं कि तालिबान ऐसा करने की बात कह रहा है। लेकिन तालिबान ने ऐसा कुछ नहीं किया है, जिससे ऐसा लगे कि सरकार बनाने के बाद वह इस बात पर कायम रहेगा।’ साल 2001 में 11 सितंबर को अमेरिका पर भयानक आतंकवादी हमले अल-कायदा ने ही किए थे।
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