विश्लेषकों का कहना है कि जिस दौर में अल-कायदा अपने को फिर से संगठित करेगा, संभव है कि उसकी उसी वक्त अमेरिका को खबर न मिले। उनका कहना है कि हालांकि अल-कायदा का मकसद पश्चिमी देशों के खिलाफ ही हमले करना है, लेकिन अभी अफगानिस्तान के लड़ाकू गुटों का यह फौरी मकसद नहीं है। एक अधिकारी ने एनबीसी से कहा- ‘उन्होंने यह समझा है कि पहले जरूरत अपने घर में अपने पांव जमा लेने की है। उसके बाद वे वैश्विक जिहाद के लिए सोचेंगे, जो बात आज भी उनके दिमाग में है।’
अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि अल-कायदा निकट भविष्य में इतना ताकतवर नहीं हो पाएगा, जिससे वह विदेशी जमीन पर जाकर हमले कर सके। एक अधिकारी ने कहा- ‘मेरी राय में अगले 12 महीनों तक उसके ऐसा कर पाने का खतरा कम ही रहेगा।’ लेकिन अधिकारियों की राय है कि जब अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बन जाएगी, जब अल-कायदा के फिर से संगठित होने की राह में कोई रुकावट नहीं बचेगी। अपनी ताकत बढ़ाने के बाद वह विदेशों में हमला करने की साजिश रचने लगेगा।
मेकेंजी ने पिछले महीने दिए अपने इंटरव्यू में कहा था कि उनकी राय में तालिबान अल-कायदा को फिर से संगठित होने से नहीं रोकेगा। उन्होंने कहा- ‘मुझे ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं, जिससे मुझे भरोसा हो कि तालिबान ऐसा करेगा। मैं जानता हूं कि तालिबान ऐसा करने की बात कह रहा है। लेकिन तालिबान ने ऐसा कुछ नहीं किया है, जिससे ऐसा लगे कि सरकार बनाने के बाद वह इस बात पर कायम रहेगा।’ साल 2001 में 11 सितंबर को अमेरिका पर भयानक आतंकवादी हमले अल-कायदा ने ही किए थे।