क्या अमेरिका में ज्यादातर डॉक्टरों को कोविड-19 के मरीजों के मनोक्लोनल एंटीबॉडीज इलाज की जानकारी नहीं है? ये सवाल टीवी चैनल सीएनएन की एक खोजी रिपोर्ट से उठा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक बहुत से मरीजों ने टीवी चैनल से कहा कि डॉक्टरों ने उनसे कभी एंटीबॉडीज इलाज की चर्चा नहीं की। जबकि लगभग एक साल पहले अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने इस इलाज की मंजूरी दे दी थी। एफडीए के मुताबिक कोविड-19 संक्रमण के आरंभिक चरण में मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज चिकित्सा ऐसा उपाय है, जिससे मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने या उनकी मृत्यु की दर बहुत घट जाती है।
सीएनएन के मुताबिक अमेरिका की संघीय सरकार ने इस बारे में डॉक्टरों को शिक्षित करने की कोशिशें की हैं। इस साल अगस्त में इस बारे में कोरोना महामारी के बारे में बाइडन प्रशासन के सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची ने एक प्रेजेंटेशन भी दिया था। संक्रामक रोग विशेषज्ञ और यूसीएसएफ स्कूल ऑफ मेडिसीन में प्रोफेसर डॉ. पीटर चिन-होंग ने सीएनएन से कहा- ‘यह बात समझ से बाहर है। हमारे पास ऐसी दवा है, जिसके बारे में साक्ष्य मौजूद हैं। ये दवा सरकार मुफ्त दे रही है। लेकिन हमारे सिस्टम में ऐसी रुकावटें हैं, जिनके कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।’
अपने अध्ययन के दौरान सीएनएन ने डॉ. फाउची से पूछा कि अस्पतालों में डॉक्टर एंडीबॉडीज चिकित्सा क्यों नहीं दे रहे हैं। इस पर उनक जवाब था- ‘मैं बताने की स्थिति में नहीं हूं। यह इलाज कारगर होता है। हमें लोगों को ये बात समझानी होगी।’ मोनोक्लोनल प्रयोगशाला में तैयार एंटीबॉडीज हैं। इन्हें मनुष्य के प्राकृतिक एंटीबॉडीज की नकल कर तैयार किया जाता है। ये एंटीबॉडीज कोविड-19 वायरस को मानव कोशिकाओं से जुड़ने से रोक देते हैं। इस कारण ये वायरस शरीर के अंदर नए वायरस नहीं पैदा कर पाते। उससे शरीर नुकसान से बच जाता है।