पर्यवेक्षकों का कहना है कि अपने कुछ मुश्किलें खुद बाइडन ने खड़ी कीं। मसलन, अफगानिस्तान से फौज वापसी के मामले में वे दूरदर्शिता दिखा सकते थे। लेकिन उनकी बेसब्री के कारण दुनियाभर में ये धारणा बनी कि अमेरिका पराजित हो गया है। इसे लेकर रिपब्लिकन पार्टी ने देश के अंदर मौजूदा प्रशासन पर हमले तेज कर दिए। इसी तरह आव्रजकों के मामले में बाइडन प्रशासन का रुख भ्रामक रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये तमाम बातें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हक में गई हैं। संभवततया इसे समझते हुए ही उन्होंने अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। इससे मीडिया में ये चर्चा जोर पकड़ गई है कि ट्रंप 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में फिर खड़ा होंगे और उसका अभियान उन्होंने अभी से छेड़ दिया है।
बीते सप्ताहांत आयोवा राज्य में एक रैली में ट्रंप ने कहा- ‘आज हमारी सड़कों पर हिंसक अपराधी गिरोह खुलेआम घूम रहे हैं। गैर-कानूनी विदेशी और खतरनाक ड्रग गिरोह हमारी सीमाओं पर जम गए हैं, महंगाई बढ़ रही है, चीन हमारी नौकरियां छीन रहा है, तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया है, पागल वामपंथियों ने हमारे स्कूलों पर कब्जा कर लिया है, और रैडिकल सोशलिस्टों ने हमारे देश को अपने हाथ में ले लिया है।’ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ट्रंप के ऐसे दावों के लिए जनसमर्थन बढ़ने लगा है, जो डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।