नेहा नरूला ने कहा- ‘एमआईटी में जो रिसर्च हो रहा है, उसमें यह मान कर चला जा रहा है कि डिजिटल मुद्रा के साथ साथ नकदी मुद्रा का अस्तित्व भी बना रहेगा। जो लोग नकदी का इस्तेमाल करना चाहेंगे, वे ऐसा कर पाएंगे।’ अमेरिका में डिजिटल डॉलर लॉन्च करने की कोशिश इस समझ के साथ शुरू की गई है कि विश्व अर्थव्यवस्था में डॉलर का वर्चस्व बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी में ग्रैजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर डैरेल डुफी ने सीएनबीसी से कहा- ‘अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी मौजूदा अग्रणी भूमिका को लेकर आश्वस्त नहीं रहना चाहिए। उसे इस बारे में एक स्पष्ट रणनीति बनानी चाहिए कि डॉलर की शक्ति का लाभ उठाते हुए मुद्रा के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति कैसे कायम रखी जाए।’ उधर वित्तीय एजेंसी हिमैन कैपिटल मैनेजमेंट के विशेषज्ञ काइल बास ने कहा है कि पश्चिमी देशों ने पिछले 30-40 वर्षों में जिन चुनौतियों का सामना किया है, उनमें डिजिटल युवान सबसे बड़ी चुनौती है।
इस बीच चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में युवान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा का रूप लेने की गति तेज हो गई। रेनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना के एक अध्ययन का हवाला देते हुए अखबार ने कहा है कि आने वाले वर्षों में युवान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। 2020 में युवान अंतरराष्ट्रीयकरण सूचकांक 5.02 पर पहुंच गया। यह 2019 की तुलना में 54.2 फीसदी की बड़ी उछाल है। उछाल की ये दर जापानी येन या ब्रिटिश पाउंड की तुलना में ज्यादा है।