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यूएनएचआरसी: संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख ने कहा, तालिबान के नरसंहार की पुख्ता सूचना

Wed, 25 Aug 2021 04:15 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, जिनेवा

सार

  • यूएनएचआरसी ने अफगानिस्तान पर बुलाया विशेष सत्र, महिलाओं के साथ तालिबान के व्यवहार को बताया ‘खतरे की लाल लकीर’
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संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाखलेट (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाखलेट ने मंगलवार को कहा कि उनके पास तालिबान की तरफ से अफगानिस्तान में गंभीर हिंसक वारदातों को अंजाम दिए जाने की पुख्ता रिपोर्ट हैं। इनमें नागरिकों और आत्मसमर्पण करने वाले अफगान सुरक्षा बलों के छोटे नरसंहार भी शामिल हैं।

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मिशेल बाखलेट ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के अफगानिस्तान पर बुलाए गए विशेष सत्र में यह बात कही। हालांकि उन्होंने इन नरसंहारों का ब्योरा नहीं दिया, लेकिन जिनेवा फोरम से तालिबान की हरकतों की करीबी निगरानी का तंत्र बनाने की अपील की। बाखलेट ने कहा, तालिबान का महिलाओं और लड़कियों के साथ व्यवहार खतरे की एक मूलभूत लाल लकीर है। उन्होंने हालिया महीनों में हत्याओं और साजिशन हमलों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा, अफगानिस्तान के विविध जातीय व धार्मिक अल्पसंख्यक भी हिंसा और दमन के खतरे की जद में हैं।

सत्र के दौरान अफगानिस्तान की अपदस्थ सरकार के यूएन में वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधि नासिर अहमद अंदिशा ने तालिबान की हरकतों की जवाबदेही तय करने की अपील की। उन्होंने अफगान हालात को अनिश्चित और गंभीर बताया, जहां लाखों लोग अपनी जिदंगी को लेकर भय के साये में जी रहे हैं। स्वतंत्र यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी संयुक्त बयान में कहा कि बहुत सारे लोग अब भी छिपते घूम रहे हैं, क्योंकि तालिबान लगातार घर-घर जाकर तलाशी ले रहे हैं और संपत्ति जब्त कर रहे हैं।
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पाकिस्तान का बिना तालिबान के नाम वाला मसौदा संकल्प किया जाएगा मंजूर
मानवाधिकार परिषद सत्र की समाप्ति पर पाकिस्तान की तरफ से दाखिल मसौदा संकल्प को मंजूर करेगी, जिसमें मानवाधिकार हनन पर चिंता जताई गई है। हालांकि इस संकल्प में न तो तालिबान का नाम लिया गया है, न ही उनके खिलाफ जांच के लिए एक इंटरनेशनल फैक्ट फाइंडिंग मिशन के गठन का ही जिक्र है। इसके बजाय इस संकल्प में यूएनएचआरसी प्रमुख से परिषद के मार्च, 2022 सत्र में रिपोर्ट पेश करने और अफगानिस्तान में सभी पक्षों से महिला व अल्पसंख्यकों की पूर्ण व सार्थक भागीदारी समेत मानवाधिकार कानूनों का पालन करने की अपील शामिल है।

हालांकि अफगानिस्तान स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष शहरजाद अकबर ने इस संकल्प मसौदे को खारिज करते हुए ‘हास्यास्पद’ बताया। उन्होंने परिषद से अपील करते हुए कहा, कृपया सुनिश्चित कीजिए की यह सत्र एक विश्वसनीय और मजबूत परिणाम वाला साबित हो।

सत्र में चीन ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया पर लगाया मानवाधिकार हनन का आरोप
सत्र के दौरान उस समय आपसी तनातनी का माहौल बन गया, जब जिनेवा में चीन के यूएन प्रतिनिधि चेन ज्यू ने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं पर अफगानिस्तान में मानवाधिकार हनन का आरोप लगा दिया। ज्यू ने कहा कि अमेरिका व उसके गठबंधन सहयोगियों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अमेरिका ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में नागरिकों, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ बदले की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि अमेरिका ने तालिबान का नाम नहीं लिया।

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