क्राइमिया प्लेटफॉर्म में जर्मनी की नुमाइंदगी वहां के ऊर्जा मंत्री पीटर अल्तमियर ने की। अमेरिका की ऊर्जा मंत्री जेनिफर ग्रैनहोल्म ने भी इसे संबोधित किया। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि क्राइमिया पर रूस के कब्जे की अब पश्चिमी देशों में शायद ही चर्चा होती है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन यह स्पष्ट कर चुके हैं कि क्राइमिया के बारे में वे कोई बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। क्राइमिया के निवासियों को रूसी पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। क्राइमिया को रूस में मिलाने के पहले पुतिन ने वहां जनमत संग्रह करवाया था, जिसमें वहां निवासियों के भारी बहुमत ने रूस के साथ रहने की राय जताई थी।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक सोमवार के सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधियों ने क्राइमिया पर कब्जा करने के लिए रूस की कड़ी निंदा की। लेकिन स्लोवेनिया जैसे देशों का रुख अस्पष्ट रहा। स्लोवेनिया के राष्ट्रपति बोरूट पाहोर ने सिर्फ इतना कहा कि उनके देश का रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अच्छा संबंध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस और यूक्रेन आपसी बातचीत से क्राइमिया समस्या का समाधान ढूंढ लेंगे।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि सोमवार को हुए सम्मेलन में सभी भाषण अंग्रेजी या यूक्रेनियन या तातार भाषा में दिए गए। एक भी भाषण रूसी भाषा में नहीं हुआ, जो क्राइमिया के लोगों की भाषा है। इसे इस बात संकेत माना गया कि जेलेन्स्की इस सम्मेलन के जरिए भले क्राइमिया मसले को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में लाने में एक हद तक सफल रहे हों, लेकिन क्राइमिया की जनता के बीच समर्थन पाने में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली है।